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हाल ही में मीडिया में बुंदेलखंड के ललितपुर जिले की शाकुन के बारे में खबर आई थी कि वह 12 वर्षों से मिट्टी खाकर जिंदा है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जानकारी में जैसे ही यह खबर आईए उन्होंने मदद का आदेश दिया।

आदेश मिलते ही जिला प्रशासन ने रजवाड़ा की रहने वाली शाकुन को तत्काल 10 किलो गेहूं और 10 किलो चावल मुहैया कराया। साथ ही उसे तत्काल राज्य सरकार की ओर राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना के अंतर्गत 30 हजार रुपये की आर्थिक मदद दी गई। मुख्यमंत्री ने स्थिति की सही-सही पड़ताल करने को भी कहा।

जांच जारी है, वैसे शाकुन के मिट्टी खाने की वजह के बारे में साफ-साफ पता नहीं चल सका है। हालांकि पड़ताल में एक बात सामने आई है कि ऐसा भुखमरी, गरीबी या लाचारी की वजह से नहीं था। दरअसल शाकुन बीपीएल कार्ड धारक है और उसे सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत कोटे का राशन भी मिलता है। अलग से गांव वालों और ग्राम प्रधान से भी मदद मिलती है। इसके अलावा उसे हर माह समाजवादी पेंशन स्कीम के तहत 500 रुपये की आर्थिक मदद भी मिलती है।

शाकुन के नाम पंजाब नेशनल बैंक के खाते में एक लाख 35 हजार रुपये भी जमा हैं। इतना ही नहींए उसके परिवार के पास 0.905 हेक्टेयर कृषि योग्य जमीन है। इन सभी तथ्यों का पता लगने के बाद जिला प्रशासन ने रिपोर्ट भेजकर बताया कि शाकुन भुखमरी की कगार पर नहीं हैं, हालांकि उसे हर प्रकार की मदद पहुंचा दी गयी है।

इससे एक बात साफ हो गई कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बुंदेलखंड के लोगों की स्थिति सुधारने को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। वहीं, मामला चाहे जो भी हो लेकिन वह मदद देने में कभी पीछे नहीं हटते।