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उत्तर प्रदेश में चुनावी बिगुल बज चुका है। सभी दल जनता को रिझाने में लगे हुए हैं। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी जनता के बीच अपनी विकास रथयात्रा लेकर निकल पड़े हैं। उधर बीजेपी और बसपा जैसे दल यूपी में एक बार फिर जाति और धर्म आधारित राजनीति करने की जुगत कर रही हैं। लेकिन अपने सम्पूर्ण कार्यकाल में अखिलेश यादव ने जिस तरह से प्रदेश को विकास के पथ पर आगे बढ़ाने का काम किया है। उससे विपक्षियों के हौसले पस्त हैं। इसीलिए विपक्षी दल साम्प्रदायिकता और जातिवाद का सहारा ले रही हैं।

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सीएम अखिलेश यादव ने अपनी समाजवादी विकास रथयात्रा के दौरान जनता से विकास के नाम पर वोट करने की अपील की। अखिलेश यादव ने यूपी में रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे ज्यादा विकास कार्य किया है। जहां बीजेपी के शासन में प्रदेश में समाज में भेदभाव बढ़ जाता है। तो वहीं बसपा के शासन में मायावती प्रदेश में जगह-जगह पत्थर लगाकर जनता के पैसे को पानी की तरह उड़ाया। मायावती के समय में तो सीएम कार्यालय आम जनता के लिए बंद हो जाता था। चाहे मुंबई से प्राइवेट जेट को भेजकर मायावती का चप्पल मंगाना हो या अपने जन्मदिन पर गरीबों का मजाक उड़ाते हुए नोटों की माला पहनना हो। मायावती सिर्फ और सिर्फ जनता के साथ खिलवाड़ करती हैं।

वहीं अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश का विकास करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। लखनऊ में मेट्रो का निर्माण, कौशल विकास मिशन से युवाओं को रोजगार दिलाना, 18 लाख युवाओं को लैपटॉप देकर रिकॉर्ड बनाना और समाजवादी पेंशन जैसी योजनाओं से आज यूपी की जनता खुशहाल है। ऐसे में हम सभी को यूपी में एक बार फिर विकास की राजनीति करने वाले अखिलेश यादव को चुनना चाहिए।