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उत्तर प्रदेश में अपराध पर नियंत्रण और अपराधियों पर लगाम लगाने के लिए अखिलेश सरकार ने प्रदेश में नया गुंडा एक्ट लागू किया है। सरकार अब गोहत्या, यौन शोषण और बाल श्रम जैसे अपराधों पर उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 के तहत कार्रवाई करेगी। नये प्रावधानों के तहत गैरकानूनी परिवहन, तस्करी और गोहत्या जैसे अपराधों को गुंडा अधिनियम के दायरे में लाया गया है। बाल श्रम, हरे पेड़ों की कटाई, यौन शोषण और मानव तस्करी जैसे अपराधों को भी इस नए कानून में जगह दी गई है। इसके तहत अब गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट दोनों में ही जिलाधिकारी को कार्रवाई करने का अधिकार होगा।

अपराधियों की संपत्ति भी जब्त होगी और आरोपियों को 14 दिन के बजाय 60 दिन तक हवालात में डालकर उनके खिलाफ जांच की जा सकेगी। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने इस एक्ट को मंजूरी दे दी है। इसके साथ नया गुंडा एक्ट सोमवार से राज्य में लागू हो गया है। इसके अलावा प्रदेश सरकार अब गिरोहबंद और समाज विरोधी क्रियाकलाप निवारण संशोधन कानून भी लागू करने जा रही है। नए कानून के तहत मानव तस्करी, गोहत्या, पशु तस्करी, मनी लॉन्ड्रिंग, बंधुआ मजदूरी, बाल मजदूरी, जाली नोट, नकली दवाओं के कारोबार के अलावा अवैध खनन जैसे अपराधों पर भी गुंडा एक्ट लगाया जा सकेगा। इन अपराधों में जमानत आसानी से नहीं होगी। गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट दोनों में ही डीएम को कार्रवाई का अधिकार होगा।

यूपी गुंडा नियंत्रण एक्ट, 1970 में संशोधन के बाद इसके दायरे में कुछ और अपराधों को लाने के लिए नई धाराओं को जोड़ा गया हैं। यह एक्ट यूपी गुंडा नियंत्रण अधिनियम 1970 में संशोधन के बाद जारी किया गया है। गोवध निवारण अधिनियम 1955 और पशुओं के प्रति क्रूरता का निवारण अधिनियम 1960 में उपबन्धों के उल्लंघन में मवेशियों के अवैध परिवहन और तस्करी के कार्यों को इसके अंतर्गत रखा गया है। इस एक्ट में अधिनियम 1970 की धारा-2 के खण्ड (ख) में उपखण्ड (7) के बाद कुछ उपखण्ड बढ़ाए गए हैं। इसके तहत साहूकारी विनियमन अधिनियम 1976 के अधीन दंडनीय अपराध के अंतर्गत होगा। इसके साथ ही विधि विरूद्ध क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम 1966 और भारतीय वन अधिनियम 1927 के अधीन दंडनीय अपराध भी इसमें शामिल होंगे। इसी तरह वाणिज्यिक शोषण, बाल श्रम, बंधुआ श्रम, बाल श्रम, यौन शोषण, अंग हटाने, भिक्षावृत्ति और इसी प्रकार के अपराध मानव व्यापार के अंतर्गत होंगे।