image

बरेली में पुलिस अधीक्षक (नगर) के पद पर तैनात समीर सौरभ का नाम उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रपति पुलिस पदक के लिए भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। समीर सौरभ उत्तर प्रदेश पुलिस का वह चेहरा हैं जो अक्सर रोजमर्रा की गढ़ी, बनाई कहानियों में पीछे छूट जाती है। घटना 2012 की है तब समीर आगरा में तैनात थे। एटा के ब्रजपुर गांव के रहने वाले ब्रजेंद्र पाल सिंह जादौन का पुत्र नीतेंद्र कुमार सिंह आगरा की बैनारा पिस्टन फैक्ट्री में काम करता था। वह सिकंदरा में किराए के मकान में रहता था। 2 दिसंबर 2012 को वो काम पर जाने के लिए निकला था लेकिन लौटकर घर नहीं आया। परेशान घरवालों ने आगरा के सिकंदरा थाने में नीतेंद्र की गुमशुदगी दर्ज करा दी। नीतेंद्र को लापता हुए चार दिन बीत चुके थे, तभी नीतेंद्र के पिता ब्रजेंद्र पाल सिंह के मोबाइल पर एक फोन आया। फोन करने वाले ने उन्हें बताया कि उनका बेटा नीतेंद्र उसके पास है और उसे छोड़ने की एवज में 15 लाख रुपये की फिरौती मांगी। 

समीर पर अब दोहरी जिम्मेदारी थी। नीतेंद्र को सकुशल उसके घर वालों तक पहुंचने और अपराधियों को पकड़ने की, क्योंकि घरवालों से संपर्क करने साथ-साथ बदमाश लगातार अपनी लोकेशन बदल रहे थे, लिहाजा सर्विलांस के जरिए भी उन्हें दबोचना कठिन था। इस तरह एक माह बीत गया, पर समीर अपनी योजना तैयार कर चुके थे। समीर अपनी टीम के साथ एक प्राइवेट बुलेरो गाड़ी से राजस्थान के धौलपुर पहुंच चुके, जहां बदमाशों से आमने-सामने की मुठभेड़ में नीतेंद्र को सकुशल छुड़ा लिया। मुठभेड़ के दौरान समीर सौरभ के साथ में गोली लग गई और चार पसलियां भी टूट गईं, इसके बावजूद वे पीछे नहीं हटे और एके 47 से फायर करते हुए बदमाशों को भागने पर मजबूर कर दिया। दरअसल नीतेंद्र को एक लड़की ने मिस्ड काॅल के बहाने प्रेम जाल में फंसाया और धौलपुर बुला लिया। लड़की भी गिरोह की एक सदस्य थी।