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कौन आया है?… छोटे कप्तान!

दरोगा जी, कह दो कि चप्पल घिस गई है और नई साड़ी भी चाहिए…

ये संवाद कोई फिल्मी डाॅयलाॅग नहीं हैं, बल्कि पिछले दो वर्ष से थाने में आसरा पाई एक बुजुर्ग महिला के आत्मीय स्वर हैं। 75 साल की सोमवती को उनके अपने बेटों ने घर से निकाल दिया था तो वे बेसहारा होकर थाने में  न्याय मांगने आई थीं। पर अब वे बेसहारा कहां। बेटों ने भले ही परवाह नहीं की पर पुलिस की बात छोड़िए पूरा बिधुना थाना ही उन्हें मां जैसा प्यार, सम्मान देता है और देखभाल करता है। जी हां! ये चेहरा है उत्तर प्रदेश की औरैया पुलिस का।

सोमवती मार्च 2014 में बेटे की शिकायत लेकर बिधुना थाने आई थीं। वह बहुत गुस्से में थीं। तत्कालीन सीओ शिवराज ने उन्हें कुर्सी पर बैठाकर पानी पिलाया और मिठाई खिलाई तो गुस्सा शांत हो गया। फिर समस्या पूछी तो वह रो पड़ीं। बताया बेटा बहुत परेशान करता है। सीओ ने तत्काल पुलिस भेजकर उनकी समस्या का समाधान कर दिया। हालांकि, पुलिस के व्यवहार से वह इतना प्रभावित हुईं कि उन्होंने घर न जाने का फैसला कर लिया। थोड़े असमंजस के बाद सीओ ने उन्हें थाने में रहने की इजाजत दे दी। मेस का खाना और थाने की आवभगत से

सोमवती को सहारा मिला और अब वे खुश हैं। पूरे थाने को अपना परिवार मानती हैं। महिला आरक्षी को बेटी मानती है। पर बेटे आज तक उन्हें पूछने नहीं आए। अलबत्ता वर्तमान में इटावा में तैनात शिवराज वक्त मिलते ही सोमवती से मिलने के लिए बिधूना जाना नहीं भूलते।

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डीजीपी के पीआरओ राहुल श्रीवास्तव ने बताया कि शिवराज ने समाज के सामने पुलिस के मानवीय चेहरे का उदाहरण पेश किया है। डीजीपी जावीद अहमद जल्द उन्हें ऑफिस बुलाकर सम्मानित करेंगे। सोमवती थाना में तैनात सभी पुलिसकर्मियों की अम्मा बन गई हैं। ड्यूटी सुबह की हो या शाम की, सबसे पहले पुलिसकर्मी अम्मा के पास जाकर उनका हालचाल लेते हैं। अक्सर पुलिसकर्मियों के बीच होने वाले झगड़े में अम्मा ही पंचायत करती हैं।