2016-09-02

“परहित सरिस धर्म नहीं भाई, पर पीड़ा सम नहीं अधिमाई।”

कहते हैं कि दुनिया में अपने गम से ज्यादा और भी गम है। इसलिए हमें दूसरों के गमों को हल्का करने की कोशिश करनी चाहिए। आपकी एक छोटी सी पहल किसी का जीवन बदल सकती है। लखनऊ के बंथरा में रहने वाले किसान राकेश कुमार सिंह जिनकी उम्र 42 वर्ष थी। वह अब इस दुनिया में नहीं रहे। लेकिन उन्होंने मरने के बाद जो काम किया है। वह लोग जीते जी नहीं कर पाते हैं। उनके अंगों से पांच लोगों को नया जीवन मिलेगा। राकेश बिजली पोल पर चढ़कर लाइट ठीक करते समय गिर पड़े थे, जिससे उनके सिर में चोट लगी और उनकी मौत हो गयी।

उनकी पत्नी मालती देवी ने उनके अंगदान का निर्णय लिया गया। किसान राकेश कुमार सिंह समाजसेवी प्रवृत्ति के थे। 29 अगस्त को वह बंथरा के सैदपुर पुरही प्राथमिक विद्यालय किसी काम से गए थे। तभी वहां की शिक्षिका ने स्कूल में बिजली न आने की जानकारी उन्हें दी और कहा कि वह बिजली ठीक कर दें।

डॉक्टरों ने राकेश की पत्नी मालती देवी से अंगदान के महत्व के बारे में बताया। तो मालती देवी इसके लिए तैयार हो गयी। राकेश अब अमर हो जाएंगे। उनके अंगों से पांच लोगों को नया जीवन दिया जा सकता है। सोशल समाजवादी राकेश और उनकी पत्नी की इस सोच को सलाम करता है। राकेश अब सदा के लिए अमर हो जायेंगे।