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कहते हैं अगर आप में प्रतिभा है, तो उसे पहचान मिलने में समय नहीं लगता है। जरूरत है, तो सिर्फ अपनी प्रतिभा को निखारने के लिए लगातार मेहनत करते रहना चाहिये। इस बात की जीती जागती मिसाल हैं उत्तर प्रदेश के इलाहबाद की छात्रा पूर्णा श्रीवास्तव। इलाहबाद के गर्ल्स हाईस्कूल एंड कॉलेज की छात्रा पूर्णा श्रीवास्तव ने संगमनगरी का नाम रौशन किया है। राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्रतियोगिता में चुने जाने के बाद पूर्णा की पेंटिंग ने यूनेस्को के अंतर्राष्ट्रीय फेस्टिवल ‘चिल्ड्रेन आर पेंटिंग द वर्ल्ड एशिया’ के लिए चुन ली गयी है।

पूर्णा की इस पेंटिंग की खास बात यह है कि पोस्टर और एक्रेलिक कलर से मधुबनी स्टाइल में बनाई गई है। पूर्णा की पेंटिंग 3 से 17 साल उम्र के बच्चों द्वारा बनाई गई पांच श्रेष्ठ भारतीय पेंटिंग में से एक है। मधुबन नाम की इस पेंटिंग में पूर्णा ने कृष्ण व राधा को चित्रित किया है। चार अन्य बच्चों के साथ पूर्णा को 4 से 8 सितम्बर के बीच कजाकिस्तान की सांस्कृतिक राजधानी अलमेटी सिटी में आमंत्रित किया गया है। उनकी पेंटिंग इस शहर की स्थापना के 1000 वर्ष पूरे होने पर खासतौर पर तैयार किए जा रहे एल्बम में शामिल की जाएगी। पूर्णा के पिता सरल श्रीवास्तव हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं और मां नीलम श्रीवास्तव बाल भारती स्कूल में शिक्षिका हैं।

पूर्णा की ये सफलता न सिर्फ उत्तर प्रदेश का मान बढ़ा रही है, बल्कि दुनिया में भारत का नाम भी रोशन कर रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर आपके अंदर प्रतिभा और कुछ करने का जज्बा है। तो आपके प्रतिभा का लोहा पूरी दुनिया मानेगी। पूर्णा की सफलता हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत की तरह है, जो हमें कुछ करने का हौसला देती है।