monsoon changed bundelkhand (1)

बुंदेलखंड का कश्मीर कहा जाने वाला महोबा जिले का चरखारी एक बार फिर अपनी नैसर्गिक सुंदरता बिखेर रहा है। कभी सूखे के कारण बर्बादी के मुहाने पर खड़ा यह इलाका मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कोशिशों के चलते एक बार फिर न सिर्फ हराभरा हो गया है, बल्कि यहां और पूरे महोबा जिले में वाटर लेवल भी बढ़ चुका है। बुंदेलखंड को सूखे से उबारने के नाम पर जहां राजनीतिक दल सियासत की रोटियां सेंकने में जुटे थे, उसकी वक्त अखिलेश यादव इस इलाके की समस्या का दीर्घकालीन हल निकालने में जुटे थे। उन्होंने बुंदेलखंड के सूखे को चुनौती के रूप में लिया। इस क्षेत्र के सभी सातों जिलों में तालाबों के पुनर्जीवन के लिए खुदाई का काम युद्ध स्तर पर शुरू कराया। महोबा जिले में चंदेलकालीन तालाबों की खुदाई का जायजा लेने के लिए मुख्यमंत्री ने खुद चरखारी गए। उन्होंने तब लोगों से वादा किया था कि आगे आने वाले समय में महोबा को पानी की किल्लत से जूझना नहीं पड़ेगा। मानसून आने साथ अखिलेश यादव की मेहनत भी दिखाई देने लगी। आज यहां के पुराने समय में खोदे गए तालाब 200 साल बाद एक बार फिर लबालब हैं। तो कभी भूगर्भ जल के अभाव में सूख चुके हैंडपंप से भी पानी निकलने लगा है। यहां के लोग सीएम के इस काम की सराहना कर रहे हैं। चरखारी के इतिहासकार खेमराज पाठक तो चरखारी के तालाबों की रौनक देखकर भावुक हो गए। उन्होंने कहा, महोबा और चरखारी का ऐतिहासिक गौरव लौटाने के लिए बुंदेलखंड मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का हमेशा आभारी रहेगा।