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‘विकास से विजय की ओर’ रथ यात्रा के माध्यम से ऊर्जावान मुख्यमंत्री अखिलेश यादव लखनऊ से उन्नाव के लिए निकल रहे हैं। लोकतंत्र का इतिहास लिखने के लिए अखिलेश यादव की यह तीसरी रथयात्रा पर निकल रहे हैं। इससे पहले सीएम अखिलेश ने हजारों किमी की साइकिल यात्रा करने का रिकार्ड भी अपने नाम दर्ज किया हुआ है। अखिलेश यादव पहली बार 2001-2002 में क्रांति रथ यात्रा पर निकले थे। साथ ही यूपी की जनता को अहंकारी मुख्यमंत्री मायावती से निजात दिलाने के लिए 2011-12 में भी वे क्रान्तिरथ से पूरे प्रदेश में जनसंवाद पर निकले थे। जिससे प्रदेश में बहुमत की समाजवादी सरकार बनी थी।

ऐसे में एक बार फिर विकास रथयात्रा के जरिये अखिलेश यादव लोकतंत्र की आवाज को बुलंद कर रहे हैं। यह रथ वास्तव में समाजवादी सिद्धान्तों और विचारों को समर्पित ऐतिहासिक रथ है। जिसको लेकर आम जनता में उत्साह चरम पर है। सीएम अखिलेश को आज यूपी के नौजवान, किसान, मजदूर और महिलाएं अपना पसंदीदा सीएम मानती हैं। इसकी मुख्य वजह बीते साढ़े चार वर्षों में सीएम अखिलेश यादव के नेतृत्व में समाजवादी सरकार ने जिस प्रकार समाज के अंतिम व्यक्ति की आंखों में खुशी और समृद्धि की चमक पहुँचायी है, उससे जनता का भरोसा मजबूत हुआ है। समाज के सभी वर्गों के साथ हर क्षेत्र में विकास कार्य तेजी से पूरा किया है। जिसकी वजह से गरीबों मजलूमों के प्रति विशेष ध्यान देने की सोच ही अखिलेश यादव को जनता के नेता के तौर पर स्थापित कर रही है।

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समाजवादी नीतियों पर चलते हुए आपसी सद्भाव और सौहार्द की अनूठी मिसाल पेश करने में मौजूदा राजनीति में अखिलेश का कोई विकल्प नहीं है। पिछड़ेपन की मार झेल रहे उत्तर प्रदेश का कायाकल्प करने की दिशा में चार से अधिक वर्ष का कार्यकाल पिछले चालीस वर्ष की तुलना में बहुत आगे निकल गया। जिसका प्रभाव अखिलेश के प्रति जनता के उत्साह और समर्थन से समझा जा सकता है। सीएम अखिलेश का मुख्य लक्ष्य उत्तर प्रदेश को ‘‘विकास से विजय की ओर’’ ले जाना है। जिसके लिए वह जनता से अपना जुड़ाव और अधिक मजबूत करने के लिए एक बार फिर से जनादेश प्राप्त करना चाहते हैं।