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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के व्यक्तित्व में बेहतर प्रशासनिक क्षमता के साथ एक महत्वपूर्ण मानवीय पहलू भी है। मुख्यमंत्री में अपने कार्यकाल के दौरान पीड़ितों की दिल खोल कर मदद की है। इंडियन एक्सप्रेस को सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी के अनुसार अखिलेश ने मार्च 2012 से नवंबर 2015 के बीच 300 करोड़ रुपये से ज्यादा की सहायता राशि बांटी है। यह रकम पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पूरे कार्यकाल में दी गई सहायता राशि से तीन गुना से ज्यादा है। मायावती ने अपने कार्यकाल में सहायता राशि के रूप में 84.76 करोड़ रुपये खर्च किए थे। जबकि अखिलेश ने 2014-15 में ही 104.99 करोड़ रुपये खर्च कर दिए। यह राशि आत्महत्या, दुर्घटना और हत्या से पीड़ित परिवारों को दी गई है। इनमें पुलिस और राज्य से जुड़े सेना के जवानों के परिवारों को भी मदद दी गई है।

किसी आपदा की स्थिति में मुख्यमंत्री अखिलेश दूसरे राज्यों को मदद देने में भी पीछे नहीं हटे। अखिलेश ने मुख्यमंत्री आपदा राहत कोष से भी 86.26 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके तहत 25 करोड़ रुपये उत्तराखंड बाढ़ के समय और 20 करोड़ रुपये जम्मू कश्मीर बाढ़ के लिए दिए गए। यूपी सरकार की ओर से दी गई सहायता राशि में सबसे ज्यादा 50 लाख रुपये एसपी जियाउल हक के परिवार को दिए गए। एसपी जियाउल हक की 2013 में कुंडा के बलिपुर में हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा बलिपुर गांव के प्रधान नन्हेलाल और उसके भाई सुरेश के परिवार को भी 40 लाख रुपये दिए। ये दोनों भी एसपी जियाउल हक की हत्या वाले दिन ही मारे गए थे। इसके अलावा समाजवादी सरकार ने 30 लाख रुपये पत्रकार जोगेन्द्र सिंह की पत्नी सुमनलता को दिए। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने अलग-अलग रेल दुर्घटनाओं में मारे गए परिवारों को 2 लाख से 5 लाख रुपये के बीच सहायता राशि दी। वहीं तरह के अन्य मामलों में दुर्घटनाओं में मारे गए लोगों के परिवारों को 50 हजार से एक लाख रुपये के बीच सहायता दी गई। कानपुर देहात के राजेश यादव के परिवार को 15 लाख रुपये और अनुराग यादव के परिवार को 15 लाख रुपये दिए गए। सतईराम की पत्नी को 10 लाख रुपये तो बाराबंकी में राम मनोरथ वर्मा की हत्या के बाद उनकी पत्नी कुसुम वर्मा को 5 लाख रुपये दिए गए। वहीं राम सुरेश की हत्या के बाद उनकी पत्नी को एक लाख रुपये मिले। पत्रकारों को दी गई मदद के आंकड़ों के अनुसार प्रतापगढ़ में एक स्थानीय अखबार के ब्यूरो चीफ अमरेश मिश्रा, राष्ट्रीय सहारा के ताहिर अब्बास और अमर उजाला के रिपोर्टर मनोज श्रीवास्तव की असामयिक मौत के बाद मुख्यमंत्री ने उनके परिवारों को 20-20 लाख रुपये की सहायता राशि दी। वहीं बस्ती के रिपोर्टर धीरज पांडे की पत्नी और पिता को 10-10 लाख रुपये देकर मदद की।

इसके बाद भी कई मौके आए जब मुख्यमंत्री ने पीड़ितों की मदद के लिए खजाने खोले हैं। हाल ही में मुख्यमंत्री ने लखनऊ में एक निर्माणाधीन भवन में हुई दुर्घटना में मृत मजदूर के परिजनों को 10 लाख  रुपये प्रदान किये थे।