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कभी सुना है किसी सरकार के बारे में जो चिललिताती गर्मी, कड़के की सर्दी या मूसलाधार बारिश में सड़क के किनारे काम करने वाले मोची के बारे में योजनाएं बनाते। नहीं ना! लेकिन उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार बड़े-बड़े विकास कार्य कराने के साथ-साथ सबसे गरीब तबके के उत्थान के बारे में भी सोचती है। तभी तो सरकार मोचियों को मोबाइल शॉप देने जा रही है।
तेज धूप में गली, नुक्कड़ों और चैराहों पर मोचियों को तो आपने देखा होगा। 

बदलते समय के अनुसार उनकी कम होती कमाई को बढ़ाने के लिए उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम ने दो साल पहले स्थाई दुकान योजना की शुरुआत तो की, लेकिन जमीन की बढ़ती कीमत के कारण योजना शुरू नहीं हो पाई तो अब अधिकारियों ने दुकान के स्थान पर मोबाइल दुकान देने का प्रस्ताव तैयार किया है। 2.28 लाख कीमत वाली इस मोबाइल दुकान पर मोची अपना कारोबार करेंगे। यह लोग शहर के आसपास के साथ ही मोबाइल फोन पर भी आम लोगों के पास पहुंच सकेंगे। सभी 18 मंडलों के सभी जिलों में यह योजना शुरू होगी। मंडलीय जिले में आठ और अन्य जिलों में चार मोबाइल दुकान का लक्ष्य है। 144 मंडलीय जिले और शेष 57 जिलों में 228 के साथ कुल 372 मोबाइल दुकान का लक्ष्य है।

क्या है योजना

अखिलेश सरकार की ओर से 29 अक्टूबर 2014 को इस योजना के क्रियान्वयन का निर्देश दिया गया। एक मोची को 2.28 लाख रुपये में 13.32 वर्गमीटर जमीन देने का प्रस्ताव था। इसके तहत 68 हजार रुपये में दुकान निर्माण के लिए देने का प्रस्ताव था। सरकार 1.6 लाख रुपये अनुदान और शेष 68 हजार रुपये का ब्याज मुक्त लोन दिलाया जाना था। 120 किस्तों में धनराशि की वसूली की जाने का प्रस्ताव था। अब इस योजना को मोबाइल शाॅप में तब्दील किया जाएगा। इस योजना योजना के लिए प्रदेश के 36 जिलों में सर्वेक्षण कराया गया। अब तक तीन दर्जन जिलों में 3950 मोचियों की पड़ताल की गई है।