हम तब तक लड़ेंगे, जब तक दुनिया में लड़ने की ज़रुरत है

235

देश को कतारों में खड़ा करने वालों ने कभी भी कतारों में खड़े लोगों की चिंता नहीं की। लेकिन दूरदर्शी सोंच और आने वाली समस्या का पहले से ही सही आकलन करने की क्षमता रखने वाले यूपी के युवा सीएम अखिलेश ने लोगों के भारी दुःख में साथ दिया। कतार में अपनी जवान गंवाने वाले लोगों के लिए सीएम अखिलेश ने 2 लाख रुपये मुवावजा देने का काम किया है।

उम्मीदों की किरण

237

उत्तर प्रदेश में अखिलेश यादव ने जब बतौर सीएम कुर्सी संभाली थी। पूरे प्रदेश की जनता को उनसे बड़ी उम्मीद थी। सियासत में ताजपोशी हुई तो वह प्रदेश के सबसे कम उम्र में बनने वाले मुख्यमंत्री हुए। राजनीतिक अनुभव बहुत तो नहीं था, पर एक ग़ज़ब की तासीर थी। उनके अंदर जो एक नयी सुबह का एहसास करा रही थी। लोगों की उम्मीदें समाजवाद के इस नए उगते हुए सूरज को सलाम करने को आतुर थीं।

कांटों से भरा मिला था ताज
239

 

मुख्यमंत्री की गद्दी तो सीएम अखिलेश को मिल गयी थी। लेकिन सरकारी खजाना पूर्व सीएम मायावती ने पत्थर की मूर्तियां और पत्थर के पार्क बनाने में खर्च कर दिया है। इसलिए आज के लिए सपना देखना भी कठिन काम था।

लचर कानून व्यवस्था सीएम अखिलेश को विरासत में मिली थी। जेल में ही सीएमओ और दिन-दहाड़े आम जनता को लोग मार रहे थे। इसके बावजूद भी विरोधी लगातार अखिलेश यादव की कार्यक्षमता पर सवाल पर सवाल उठाये जा रहे थे।

मजबूत भरोसा, इरादे लोहा

236

 

लेकिन आम जनता को पता था कि पौधे को लहलहाने में थोड़ा सा वक़्त तो लगता ही है। उसके बाद जब सीएम अखिलेश ने विकास के सपनों को हकीकत में उतारना शुरू किया, तो मानो में एक अलग ही हवा बह चली। मेट्रो, हाईवे, एक्सप्रेसवे, बिजली, 1090 और यूपी 100 जैसी योजनाओं ने यूपी को एल अलग ही पहचान देने का काम किया।

222

 

अखिलेश यादव ने सबसे ज्यादा जोर दिया नौजवानों और लड़कियों की शिक्षा पर। एक लड़के को सही समय पर नौकरी मिल जाए और एक लड़की की पढ़ाई में कोई बाधा न आये इसका उन्होंने पूरा ख्याल रखा। साथ ही प्रदेश के लोग स्वच्छ हवा में जी सकें, इसके लिए 5 करोड़ पौधे लगाने का काम किया।

बन गये जनप्रिय

240

अखिलेश के इन्ही कार्यों को देखते हुए एक बार आम जनता यूपी में उनकी दोबारा ताजपोशी होते हुए देखना चाहती है। ऐसे में आजकल पूरे यूपी में एक ही नारा गूँज रहा है। “जनता का यही सन्देश, यूपी मांगे सिर्फ अखिलेश”, ये नारा आज हर युवा, बुजुर्ग, किसान और महिलाओं के जुबान पर चढ़ा हुआ है।