pooja

उत्तर प्रदेश की मिट्टी में ही गंगा-जमुनी तहजीब घुली हुई है। तभी तो यहां कभी कोई शाहनाज जाति-धर्म की परवाह किए बगैर गरीब हिंदू बच्चों को शिक्षित बनने का बीड़ा उठाती है तो कभी महज 18 साल की पूजा कुशवाहा मुस्लिम बच्चों को पवित्र कुरान की शिक्षा देकर भाईचारा और सांप्रदायिक सदभाव की नई आयत लिख रही होती है। शाहनाज और पूजा दोनों ही आगरा के अलग-अलग इलाकों की रहने वाली हैं, लेकिन उनका मकसद सिर्फ नेकी है। शहनाज का पांच कमरों का घर जहां सप्ताह में छह दिन सुबह 11 बजे से शाम सात बजे तक गरीब परिवारों के करीब 200 बच्चों के लिए स्कूल में तब्दील हो जाता है। वहीं, पूजा हर शाम संजयनगर में बच्चों को कुरान की आयतों से रूबरू कराती है। पूजा के इस नेक काम में मोहल्ले के बुजुर्गों का भी योगदान कम नहीं है। घर में जब बच्चों की कक्षाओं के लिए जगह कम पड़ने लगी तो बुजुर्गों ने उसे पास एक मंदिर परिसर में जगह दे दी। आज खुले आसमान तले लगने वाली पूजा की कक्षा में 35 मुस्लिम बच्चे पाक इल्म पा रहे हैं।

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कुरान को लेकर पूजा की समझ और अरबी आयत के कठिन शब्दों का भी बेहद आसानी से उच्चारण कर पाने के पीछे की पूजा की कहानी भी बेहद प्रेरणादयक है। पूजा के मुताबिक, उसके मोहल्ले की ही रहने वाली संगीता बेगम उसे और दूसरे बच्चों को कुरान पढ़ाती थीं। बाद में उन्होंने पूजा को सीख दी कि शिक्षा का तब तक कोई अर्थ नहीं रह जाता है जब तक कि उससे दूसरों को शिक्षित न किया जाए। इसके बाद ही पूजा ने बच्चों को कुरान पढ़ाने का निर्णय लिया। आज उसकी कक्षा में कई ऐसे बच्चे भी हैं, जिनके परिवार के बाद फीस देने तक के पैसे नहीं होते हैं। पूजा की बड़ी बहन नंदिनी भी यहां बच्चों को हिंदी और भगवत गीता की शिक्षा देती है। आगरा के जानमाने मुस्लिम नेता 70 वर्षीय हाजी जमिलुद्दीन कुरैशी पूजा के इस पहल से अभिभूत दिखते हैं। सोशल समाजवादी पूजा की इस पहल को तहे दिल से सलाम करता है।