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मुजफ्फनगर के कसेरवा गांव के अब्दुल वाजिद और दिव्यांग हलीमा को आगे बढ़ने में अब हालात रुकावट नहीं बनेंगे। इन दोनों के हौसले की उड़ान को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पंख जो दे दिए हैं। मुख्यमंत्री ने दोनों को लखनऊ में आमंत्रित कार एक-एक लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है। वाजिद और हलीमा की लगन समाज के लिए प्रेरणास्रोत है। पहले बात करते हैं वाजिद की। दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक वाजिद खिलौने बनाने वाली एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता है। इस दौरान उसने एयर मॉडलिंग में सर्टिफिकेट हासिल किया और एक साल की कड़ी मेहनत के बाद महज सात हजार रुपये में मानव रहित छोटा सा विमान बनाने में सफलता प्राप्त कर ली। इसके बाद वह दो सीट वाले एयर क्राफ्ट के निर्माण में जुट गया। पर, 10 लाख रुपये की लागत वाले इस विमान को उठाने के लिए उसे 500 मीटर रनवे की जरूरत थी और इसके लिए सरकार से अनुमति मिलना भी जरूरी था। वाजिद की प्रतिभा की खबर मुख्यमंत्री तक पहुंची तो उन्होंने उसे लखनऊ आमंत्रित किया। वाजिद के छोटे विमान की उड़ान देखी तो उसके हुनर की सराहना की। साथ ही उसकी जरूरतें पूरी करने का भरोसा देते हुए एक लाख रुपये की मदद का एलान भी किया। इतना ही नहीं सरकारी नौकरी का आश्वासन भी दिया। अब वाजिद सितंबर में होने वाले सैफई महोत्सव में अपने एयरक्राफ्ट को उड़ा सकेगा।

कसेरवा गांव की हलिमा के कहानी वाजिद से बिल्कुल अलग है। परिस्थितियां हलीमा के अनुकूल नहीं थीं। दरअसल हलीमा के जन्म से हाथ नहीं थे। जब वह कुछ बड़ी हुई तो गांव के प्राइमरी स्कूल ने उसे एडमिशन देने से इन्कार कर दिया। लेकिन न तो हलीमा ने हार मानी और न ही उसके परिवार वालों ने। वर्ष 2007 में हलीमा के पिता मोमीन ने उसका एडमिशन कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में करा दिया। यहां कक्षा आठ के बाद हलीमा ने इंटर की पढ़ाई कस्बे के ही राष्ट्रीय इंटर कालेज से पूरी की। स्नातक के लिए मुजफ्फरनगर के श्रीराम कालेज में बीएएलएलबी में प्रवेश लिया। इसके बाद एक बार फिर परिस्थितियों में हलीमा को दगा दे दिया। कुछ दिनों पहले पिता मोमीन का निधन होने के बाद हलीमा के सामने संकट के बादल छा गए, क्योंकि उसके पिता परिवार में कमाने वाले इकलौत सदस्य थे। हलीमा की समस्या जिला पंचायत सदस्य अथर चौधरी व एमएलसी आशू मलिक के माध्यम से मुख्यमंत्री तक भी पहुंची। उसे भी एक लाख रुपये की मदद व सरकारी नौकरी का आश्वासन भी दिया। हलीमा शिक्षिका बनना चाहती है। गांव के दो होनहारों की मदद पर पूरा कसेरवा गांव गदगद है और मुख्यमंत्री अखिलेश की तारीफें करते नहीं थक रहा है।