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खा.. खा.. मैं तो नरक में जा रहा हूँ लेकिन तुम्हारी मौत का कारण बनने का बोझ अपनी आत्मा पर लेकर नहीं जाऊँगा हाँ मैंने एक बच्चे को मारा मैंने उसका सर दीवार से पटक दिया था उन्होंने मेरे बेटे को मार दिया था, मेरा बच्चा, मुसलमानों ने मेरे बेटे को मारा था फिल्म गाँधी में गुस्से से भरे ओम पुरी ने गांधी की तरफ़ रोटी का एक टुकड़ा फेंकते हुए चिल्लाते हैं।

भारतीय फिल्मों का ऐसा कलाकार जिसकी आवाज से डायलाग में वजन बढ़ जाता था। रंगमच से लेकर बॉलीवुड और हॉलीवुड में अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने वाले ओमपुरी का रिश्ता लखनऊ से बेहद ख़ास रहा है। बकौल ओमपुरी कहते थे कि अर्धसत्य, आस्था, मकबूल और गाँधी जैसी फ़िल्में उनके अदाकारी की खुराक थीं। लेकिन साथ ही वह ये भी कहते हैं कि कमर्शियल फ़िल्में न करते तो गाड़ी, बंगला और अच्छी जिंदगी न जी पाते।

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस शानदार अभिनेता के निधन पर गहरा दुःख प्रकट किया। जेपी सेंटर में जयप्रकाश नारायण की जीवनी को ओमपुरी ने भी आवाज दी है। जिसका अंश सीएम अखिलेश ने अपने ट्विटर अकाउंट पर पोस्ट किया। वास्तव में ओमपुरी एक महान अभिनेता था। जो आम भारतीय के किरदार को पर्दे पर जीवंत कर देते थे।

सिनेमा के कई स्थापित मानकों को तोड़कर अदायगी की नई इबारत लिखने वाले अभिनेता ओमपुरी का 6 जनवरी की सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वह 66 साल के थे। ओमपुरी ने ‘अर्ध सत्य’, आक्रोश’, ‘सिटी ऑफ जाय’, में अपनी बेहतरीन अदाकारी से दुनिया भर में लोकप्रियता हासिल की। ओमपुरी को पद्म श्री सम्मान से नवाजा गया था। उन्होंने कई हॉलीवुड फिल्मों में भी काम किया था।