image

प्रतिभा समय, समाज और परिस्थिति की मोहताज नहीं होती है। यह बात साबित की है शामली के 14 साल के बच्चे अब्दुल समद ने। जिस उम्र में बच्चे खेलने-कूदने में ध्यान देते हैं, उसी उम्र में समद ने बेकार पड़ी चीजों से मेट्रो रेल का वर्किंग मॉडल तैयार कर दिया। होनहार समद के बारे में जब मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को खबर मिली तो उन्होंने उसे मुख्यमंत्री आवास आमंत्रित किया, बल्कि मॉडल देखने के बाद समद को पांच लाख रुपये बतौर पुरस्कार भी दिए। इतना ही नहीं, समद के चलते उसके गांव के भी भाग्य खुल गए।

मुख्यमंत्री ने समद के गांव में आईटीआई खोले जाने की भी घोषणा की, जिससे उसके गांव के बच्चे भी उससे प्रेरणा लेकर टेक्निकल एजुकेशन ले सकें। वहीं, प्रशासन को समद की आगे की पढ़ाई सरकार की तरफ से मुफ्त कराए जाने का निर्देश दिया और कहा कि उसकी इंजीनियरिंग तक की पढ़ाई का खर्च सरकार उठाएगी।

image

तंगहाली नहीं बन सकी रोड़ा 
समद गांव के इंटर कॉलेज में दसवीं का छात्र है। बचपन से ही उसे कुछ नया करने का शौक रहता था, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते वो अपने सपनों को पर नहीं लगा पा रहा था। यही वजह है कि गांव के निम्न स्तर के संसाधनों से तैयार किए गए इस डेमो में रेल की पटरी लकड़ी की बनाई गई है। उसके नीचे लकड़ी के पोल लगाए गए हैं और ऊपर तांबे के दो तार लगाए गए हैं, जिसमें डीसी करंट दौड़ता है। इस ट्रेन के इंजन इस दोनों तारों से टच होकर उसी तरह से चलते हैं जैसे हूबहू मेट्रो ट्रेन ट्रैक पर सरपट दौड़ रही हो।
पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम हैं प्रेरणा स्रोत
समद पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम को अपना प्रेरणा स्रोत मानता है। इसके घर की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। इस वजह से यह छात्र अपनी पढ़ाई गांव के ही स्कूल में पूरी कर रहा है। उसकी चाहत है कि यदि उसे सरकार की ओर से मदद मिले और उसकी शिक्षा उच्च स्तर पर हो तो ये देश के लिए और बड़े अविष्कार कर सकता है।