उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की आहट शुरू हो गई है। सत्ता पाने की होड़ में कुछ राजनीतिक दल अभी से नई-नई चालें चलने लगे हैं। यूपी में हो रहे जबरदस्त विकास कार्यों से घबराईं पार्टियां लोगों को धर्म और जाति के नाम पर बांटने की कोशिश में जुटी हुई हैं। इसका ताजा उदाहरण कैराना का प्रकरण है। इसी प्रकरण के संदर्भ में हमारे एक जागरूक पाठक ने हमें यह कविता भेजी, जो बेहद समसामयिक है। साथ ही धु्रवीकरण और सांप्रदायिकता की राजनीति करने वालों पर करारी चोट भी है। तो आप भी पढ़िए और खुद तुलना कीजिए।

 

Poetry 2