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बदलता वक्त तकनीक का गुलाम है, जिसके साथ हमें कदम ताल मिलाकर चलना होगा। जैसा कि हमारी प्रदेश की अखिलेश सरकार तकनीकी के इस्तेमाल पर जोर दे रही है। हाल ही में सरकार ने आशाबहूओं, एएनएम और डॉक्टरों को स्मार्टफोन देने का निर्णय लिया है। जिसकी मदद से ये लोग मरीजों को बेहतर सुविधाएं दे सकें। इसके लिए प्रदेश सरकार ने एम-सेहत प्रोजेक्ट लॉन्च किया है। इसके जरिए गर्भवती महिलाओं और दम्पत्ति को स्वास्थ्य से जुड़ी हुई सारी जानकारी दी जाएगी। साथ ही विभाग स्मोर्ट फोन के जरिए आशा बहुओं, एएनएम और डॉक्टरों के कार्यों पर भी नजर रख सकेगा। इस योजना मासूम बच्चों और गर्भवती महिलाओं को समय पर इलाज मिल सकेगा।

फिलहाल अभी 10,016 आशा बहुओं को स्मार्ट फोन दिया गया है। प्रदेश सरकार ने मानवीय संवेदना को देखते हुए जिन जिलों में स्वास्थ्य व्यवस्था अच्छी नहीं थी, उन जिलों का पहले चयन किया गया है। पहले दौर में फैजाबाद, सीतापुर, कन्नौज, मिर्जापुर, बरेली में इसे पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया है।

इन स्मार्टफोनों में पहले से ही एम-सेहत इंस्टॉल है, इसके जरिए आशा बहुएं अपने क्षेत्र में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं के लाभार्थियों की जानकारी अपलोड कर सकेंगी। इस फोन का इस्तेमाल बातचीत या नेट सर्फिंग के लिए नहीं किया जा सकेगा। अब तक इस प्रोजेक्ट पर करीब 27।5 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं। बच्चे के स्वास्थ्य से जुड़ी सारी जानकारियां मां के मोबाइल पर एम-सेहत के जरिए समय-समय पर दी जायेंगी।

स्मार्टफोन को चलाने के लिए आशा बहू और एएनएम को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। कुल मिलाकर इस योजना से माता और शिशु मृत्यु दर में कमी आएगी। साथ ही आम जनता भी चिकित्सा सेवाओं से रुबरू हो पायेगी। इस फोन पर एक व्हाटसप ग्रुप भी बनाया गया है, जिस पर जिला मजिस्ट्रेट, जिला चिकित्सा अधिकारी जुड़े रहेंगे। कुल मिलाकर अगर देखा जाये तो प्रदेश के युवा मुख्यमंत्री नवजात शिशुओं और गर्भवती महिलाओं के साथ-साथ आम नागरिकों को सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा-सुविधा देने के लिए तत्पर है।