For a large number of students at Town Primary School Sikandarpur, only two teachers posted in school in Balia District of Uttar Pradesh. Express photo by Vishal Srivastav 24.03.2015

उत्तर प्रदेश बदल रहा है और यह बदलाव हर क्षेत्र में दिखाई देने लगे हैं। बदलाव के ये उदाहरण पेश कर रहे हैं कन्नौज के सरकारी स्कूल। आलम यह है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और सुविधाएं इतनी बढ़ गई हैं कि निजी स्कूलों का धंधा चौपट होने की ओर है। पहले जहां कन्नौज के स्कूलों में 30 प्रतिशत शिक्षक स्कूल ही नहीं जाते थे और करीब 60 फीसदी बच्चे पढ़ाई नहीं करते थे, वहां अब शिक्षक भी समय पर स्कूल पहुंच रहे हैं और स्कूलों में भारी संख्या में दाखिला भी हो रहा है। बदलाव का यह वाहक बना प्रशासन की वह योजना, जिसके तहत शिक्षकों को मोबाइल के जरिए स्कूल पहुंचने पर अपनी हाजिरी भेजनी पड़ती है। इसकी क्रॉस चेकिंग के लिए एक टीम भी गठित की गई है। दरअसल यहां बेसिक शिक्षा की खराब स्थिति को पटरी पर लाने के लिए सर्व शिक्षा अभियान का व्यापक अध्ययन किया गया। इस काम के लिए 80 जिलास्तरीय विभागों के अफसरों को लगाया गया। रिपोर्ट में सामने आया कि कई शिक्षक प्रतिदिन व समय से स्कूल नहीं पहुंचते। इसकी वजह से बच्चे भी स्कूल नहीं आते थे। इसके बाद व्यापक अभियान चलाया गया। हर शनिवार को मीटिंग में जहां कमियां होती हैं, वहां के शिक्षकों को बुलाया गया और सुधार न होने पर चेतावनी और दंड भी दिया जाने लगा। अभियान रंग लाया और यहां के प्राथमिक स्कूल के शिक्षक की मेहनत की वजह से आस-पास के बच्चे निजी स्कूलों की बजाए सरकारी स्कूल में आने लगे। कन्नौज में बेसिक शिक्षा में सुधार के इस मॉडल को मुख्य सचिव आलोक रंजन ने न सिर्फ तारीफ की, बल्कि इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की बात भी कही है। फिलहाल इन उपायों को कानपुर मंडल के सभी जिलों में लागू कराया जा रहा है।