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मौजूदा दौर में जब  शिक्षा के तौर-तरीकों में बदलाव आ रहा है और कक्षाओं का पुरानास्वरूप तेजी से स्मार्ट क्लासेस की शक्ल ले रहा है तो भला हमारे विद्यार्थी इस से कैसे अछूते रह सकते हैं। कम्प्यूटर या यूं कहें लैपटॉप के प्रयोग की इसमें बड़ी भूमिका है। किसी विद्यार्थी के हाथ में पढ़ाई के दौरान ही लैपटॉप आ जाए तो उसका आत्मविश्वास दोगुना हो जाएगा। आज से चार साल पहले जब समाजवादी पार्टी की सरकार ने उत्तर प्रदेश के 12 वीं पास होनहार बच्चों को फ्री लैपटॉप बांटने का निर्णय लिया था तो यह देश की इकलौती सरकार थी तो इस दिशा में आगे कदम बढ़ाने जा रही थी। आज उत्तर प्रदेश के करीब 15 लाख छात्र-छात्राएं इस फ्री लैपटॉप की बदौलत अपनी किस्मत संवार रहे हैं।

चुनाव में किए गए वादे के अनुरूप मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मार्च 2012 में पहली ही कैबिनेट मीटिंग में फ्री लैपटॉप वितरण का फैसला ले लिया था। जैसे ही इसकी घोषणा की गई विपक्षी दलों को सांप सूंघ गया। हताशा में कुछ ने इसे झुनझुना कहा तो किसी ने कागजी शेर बताया, लेकिन जैसे-जैसे इस योजना की लोकप्रियता बढ़ी, समाजवादी सरकार टॉप पर पहुंच गई और विरोधियों की बोलती बंद हो गई। अखिलेश सरकार ने शहर ही न हीं गांव-गांव में बिना किसी भेदभाव के हर जाति, धर्म, क्षेत्र और वर्ग के होनहार छात्र-छात्राओं तक फ्री लैपटॉप पहुंचाया। क्या अमीर…. क्या गरीब…. क्या गांव… कोई भेद नहीं रहा। पूरे प्रदेश में सूचना और तकनीकी शिक्षा की ओर ऐसा रूझान हुआ कि सिर्फ छात्र-छात्राएं क्या, पूरा परिवार ही लैपटॉप के जरिए नई दुनिया से वाकिफ होने लगा। गांव की चैपाल से दूर पूरी दुनिया से उन्हें जोड़ दिया। आधार कार्ड बनवाना हो, कोई फार्म भरना हो, खसरा-खतौनी निकलवानी हो या फिर वूमन पावर लाइन 1090 में छेड़छाड़ की शिकायत करनी हो, लैपटॉप हर छात्र-छात्रा और गांव-परिवार को हमराही बन गया है।

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जरा सोचिए, जहां फीस तक मुश्किल से भरी जाती है, वहां लैपटॉप का मिलना किस कदर जोश भर गया होगा। लैपटॉप ने गांव के युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ाया तो आत्मनिर्भरता का पाठ भी पढ़ा रहा है। वे जानने लगे हैं कि दुनिया के साथ कदम ताल कैसे करना है। मुख्यमंत्री अखिलेश की इस नई सोच को दुनिया ने भी सराहा। यह फ्री लैपटॉप वितरण योजना की सफलता ही थी कि तमिलनाडु सहित अन्य राज्य ने भी अपने यहां इस योजना की शुरुआत की। लैपटॉप निर्माण कंपनी एचपी भी स्वीकार चुकी है कि यह दुनिया की सब से बड़ी योजना है। इतनी बड़ी संख्या में उन्होंने कभी लैपटॉप की सप्लाई नहीं की। इसके बाद भी क्या इस योजना की सफलता और उस के महत्व को नकारा जा सकता है। निः संदेह नहीं।