E- Farmer

तकनीकी ने हमारे जीवन को आज काफी आसान बना दिया है। खासकर इन्टरनेट ने हमारे जीवन जीने के तरीके को बदलकर रख दिया है। जिसमें सोशल मीडिया का बहुत बड़ा हाथ है। सोशल मीडिया के बढ़ते संसार ने हमारे जीवन के हर पहलू को समेट लिया है। फेसबुक, व्हाट्सएप, वाइबर आदि के बढ़ते दायरे के बीच खेती-किसानी जैसे परम्परागत विषय भी सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गए हैं। इसी चर्चा को आगे बढ़ाते हुए संगमनगरी इलाहबाद के किसानों ने एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाया है। जिस पर खेती-किसानी के मसले पर चर्चा करते हैं। इसके अलावा किसान इसकी मदद से आर्गेनिक खेती को बढ़ावा भी देते हैं।

माडर्न घोष इंटर कॉलेज के टीचर और माध्यमिक शिक्षक संघ चेतनारायण गुट के मंडल मंत्री डॉ नवीन पांडेय पिछले छह महीने से आर्गेनिक खेती पर रिसर्च कर रहे थे। उन्होंने ही यह ग्रुप बनाया है। जिसमें फसलों को रोग और जानवरों से बचाने के उपाय बताने के साथ ही स्ट्राबेरी से लेकर मक्का की खेती तक के तौर-तरीके के बारे में किसानों को जानकारी मिल रही है। इससे किसानों को काफी फायदा होता है। आधुनिक समय में खेती को भी आधुनिक बनाने में सोशल मीडिया जरिये शुरू हुई ये पहल काफी अच्छी है। इससे किसानों के समय की बचत होगी। साथ ही उन्हें खाद बीज के बारे में सही जानकारी उन्हें घर बैठे मिल जाया करेगी।

इस ग्रुप में पश्चिम बंगाल कृषि विभाग के संयुक्त निदेशक अरविन्द पांडेय, बंगलुरु में एनजीओ चला रहे आनन्द पांडेय आदि को जोड़ा गया है। बकौल डॉ। नवीन ग्रुप में कृषि वैज्ञानिकों और प्रगतिशील किसानों को भी शामिल करेंगे ताकि किसानों को तथ्यात्मक और सही जानकारी मिल सके। साथ ही गांव छोड़कर शहर की ओर भाग रहे युवाओं को खेती-किसानी के लाभ बताये जायेंगे। इस तरह ये पहल किसानों के लिए काफी हितकारी साबित हो सकती है। उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार भी किसानों को डिजिटल युग से जोड़ना चाहती है। ऐसे में ये पहल सराहनीय है।