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प्रचलित धारण है कि जरूरतमंद की मदद ऐसे की जाए कि मदद पाने वाले को बोझिल न लगे। इसी अवधारणा के साथ मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं देने और नवजातों को कुपोषण से बचाने का अनूठा रास्ता निकाला है। दरअसल उत्तर प्रदेश सरकार अब गोदभराई और अन्नप्राशन जैसे समुदाय आधारित परम्परागत आयोजन अपने खर्च पर कराएगी। सरकारी खर्च पर गोदभराई और अन्नप्राशन जैसे आयोजन कराने के पीछे अखिलेश सरकार की मंशा महिलाओं और बच्चों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता पैदा करने की है। प्रदेश के आंगनबाड़ी केन्द्रों पर लाभार्थी गर्भवती महिलाओं के लिए गोदभराई और छह माह के बच्चों का अन्नप्राशन व जन्मदिन जैसे आयोजन मौजूदा समय में भी होते हैं, लेकिन अभी तक इन पर व्यय होने वाली राशि ग्राम प्रधान या सामूहिक चंदे से एकत्र की जाती है। अब सरकार ने स्निप योजना (आईसीडीएस सिस्टम स्ट्रेन्थनिंग एंड न्यूट्रीशन इम्प्रूवमेंट प्रोजेक्ट) के तहत इन आयोजनों के लिए धन देने का फैसला किया है।

योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को आंगनबाड़ी केंद्र पर बुलाकर उसको डलिया भेंट की जाएगी। इसमें परंपरा के मुताबिक मौसमी फल, नारियल, अंकुरित अनाज, गुड़, भुना चना आदि भरे होंगे। इस कार्यक्रम में खर्च के लिए प्रति गर्भवती आंगनबाड़ी केंद्र को 250 रुपये दिए गए हैं। स्निप के तहत इसमें बुंदेलखंड के छह जिले झांसी, चित्रकूट, बांदा, हमीरपुर, महोबा और जालौन को शामिल किया गया है। वहीं प्रदेश भर में कुल 41 जिलों का चयन किया गया है। इसी दौरान केंद्र में गोद भराई के समय प्रसव के पहले होने वाली तीन जांचों के बारे में महिलाओं को बताया जाएगा। एमसीपी कार्ड का इस्तेमाल महिलाएं स्वास्थ्य केंद्र पर भी कर सकेंगी। प्रधान व गांव के अन्य संपन्न लोगों के सहयोग से उन्हें एक उपहार भी दिया जाएगा।