water university

जल है, तो जीवन है। ये कहावत बहुत ही पुरानी है। लेकिन आज भी मानव जीवन के लिए उतनी ही सार्थक है। विगत वर्षों में हमने अपने आसपास और टीवी, अख़बारों में सूखे पर बड़ी-बड़ी खबरें देखी, सुनी और पढ़ी होंगी। वास्तव में आज  के समय में जल संकट बहुत बढ़ा संकट है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए, उत्तर प्रदेश में बेहतर जल प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने वॉटर यूनिवर्सिटी बनाने की घोषणा की है।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने इससे पहले सूखा प्रभावित बुन्देलखण्ड के लिए कई कल्याणकारी योजनायें बनायी। यहाँ तक कि वहां के निवासियों को मुफ्त राशन और पानी की व्यवस्था करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। क्योंकि पानी का मुद्दा लोगों के जीवन से जुड़ा है। जिसे वह बखूबी समझते हैं। यही नहीं मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण पर ध्यान देते हुए नदियों और तलाबों पर विशेष ध्यान दिया है। मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव प्रदेश की नदियों और तालाबों के पुनर्जीवन एवं पुनरुद्धार के प्रति कृतसंकल्प हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश की हिंडन, गोमती, यमुना तथा वरुणा नदी के पुनर्जीवन की पहल की है। जिसमें गोमती नदी की सफाई का काम तेजी से चल रहा है।

हाल ही में हिंडन नदी यात्रा कार्यक्रम में मुख्यमंत्री से जल पुरुष राजेन्द्र सिंह ने प्रदेश में एक वाटर यूनिवर्सिटी खोलने की मांग की। जिसे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सहर्ष स्वीकार कर लिया। साथ ही मुख्यमंत्री ने यूपी में शीघ्र ही जल प्राधिकरण बनाने की भी घोषणा की।

आज के समय में जल संरक्षण, नदी पुनर्जीवन और तालाबों के पुनरुद्धार बहुत जरूरी हैं, क्योंकि पानी से मानव का जीवन सीधे जुड़ा है। ऐसे में पानी सहेजना, इसे साफ़ और स्वच्छ रखना हमारी जिम्मेदारी हो गयी है। इस जिम्मेदारी को समझते हुए समाजवादी पार्टी ने इसे अपने चुनावी घोषणा पत्र में इसे प्रमुखता के साथ शामिल करनी की भी बात कही है। प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग ने पिछले एक माह के अन्दर बुन्देलखण्ड में 100 तालाबों की डी-सिल्टिंग का कार्य किया गया है। जो एक रिकॉर्ड है। इस तरह प्रदेश में वाटर यूनिवर्सिटी खुलने से जल सरंक्षण तो होगा ही साथ ही युवाओं को रोजगार भी मिलेगा।