CM-Bundelkhand

गरीबी और बेरोजगारी इस देश के लिए अभिशाप है। इनसे निजात पाने में अब तक की कांग्रेसी और भाजपाई नीतियाँ पूरी तरह विफल हो चुकी हैं। ये लोग इस पर सिर्फ राजनीति करते रहे हैं जबकि समाजवादी विचारधारा एक सार्थक विकल्प देने की स्थिति में हैं। जाति और सांप्रदायिकता से अलग, सामाजिक न्याय, परस्पर सद्भाव और आर्थिक विकास की राजनीति के लिए समाजवादी प्रतिबद्ध रहे हैं। हरित बुन्देलखण्ड की दिशा में समाजवादी सरकार ने जो कदम उठाए हैं उनके परिणाम भी दिखने लगे हैं। कृषि अर्थव्यवस्था को सुधारने के साथ अवस्थापना सुविधाओं का विस्तार समाजवादी सरकार का लक्ष्य है। इससे आत्मनिर्भर बुन्देलखण्ड की नींव पड़ेगी और फिर इसका गौरवशाली इतिहास लौटेगा।

श्री अखिलेश यादव 4 जून 2016 को चरखारी की यात्रा पर गए थे। उनके साथ मैं, जलपुरुष श्री राजेन्द्र सिंह, मुख्य सचिव एवं प्रमुख सचिव सिंचाई तथा एडवोकेट जनरल भी थे। इसके पूर्व पिछले दिनों मुख्यमंत्री जी ललितपुर, महोबा, बाँदा, चित्रकूट, तालबेहट, हमीरपुर, जालौन भी गए थे। मुख्यमंत्री जी ने चरखारी में जन-प्रतिनिधियों एवं सातों जनपदों के जिलाधिकारियों के साथ भी बैठकर बुन्देलखण्ड में सूखे की स्थिति की समीक्षा की और राहत कार्यों की  जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को जनता को त्वरित राहत पहुँचाने का निर्देश दिया। उन्होंने इच्छा जाहिर की कि हर गाँव में सोलर लाइट, कामधेनु योजना शुरू हो और प्रत्येक खेत तक पानी पहुँचाने की व्यवस्था हो।

सूखा संकट से ग्रस्त 7 जनपदों वाले बुन्देलखण्ड की झुलसाने वाली धरती पर अब तक आधा दर्जन बार से ज्यादा मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव दौरा कर चुके हैं। उन्हें वहाँ के जनजीवन की त्रासदी के प्रति गहरी संवेदना है जिससे प्रेरित होकर वे वहाँ राहत के हर इंतजाम की खुद निगरानी कर रहे हैं। डैम से खेतों तक पानी पहुँच रहा है। आटा, दाल, चावल, नमक, मिल्क पाउडर के पैकेट, हल्दी, शुद्ध देसी घी, सरसों का तेल, समाजवादी राहत पैकेट में बाँटे गए हैं। मुख्यमंत्री जी का संकल्प है कि जब तक बुन्देलखण्ड में स्थिति नहीं सुधरती है, राहत कार्य जारी रहेगा। बुन्देलखण्ड में शत प्रतिशत समाजवादी पेंशन से स्थानीय लोगों को लाभान्वित किए जाने की व्यवस्था की गई है।

सच तो यह है कि मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव बुन्देलखण्ड के विकास के लिए जितने गंभीर है और प्रदेश के संसाधनों से तमाम योजनाओं को पूरा करने में लगे हैं, केन्द्र की सरकार उतना ही उपेक्षापूर्ण व्यवहार कर रही है। उत्तर प्रदेश से भाजपा के 73 सांसद और केन्द्र में दर्जन भर मंत्री हैं, लेकिन वे कभी प्रदेश के हित में आवाज नहीं उठाते हैं। मुख्यमंत्री जी जो राहत पैकेज केन्द्र से मांगते हैं वह मिलता नहीं। उल्टे हालत तो यह है कि भाजपा की केन्द्र सरकार ने योजना आयोग को भंग कर जो नीति आयोग बनाया है उससे उत्तर प्रदेश को मिलने वाली राशि में 9000 करोड़ रुपये का घाटा हो गया है। केन्द्र से सूखा पीड़ितों की मदद के लिए राज्य सरकार द्वारा 7000 करोड़ रुपये मांगे गए थे, जबकि केन्द्र ने कुल 23 सौ करोड़ रुपये दिये। राज्य सरकार किसानों को 5 हजार करोड़ रुपये की मदद अपने संसाधनों से अब तक दे चुकी है।

श्री अखिलेश यादव ने बुन्देलखण्ड के पेयजल संकट के समाधान के लिए जल संचयन की अभूतपूर्व योजना की शुरुआत कर 60 एमसीएम पानी बचाने का प्लान किया है। बुन्देलखण्ड में 100 तालाबों को पुनर्जीवित करने में 65 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। उत्तर प्रदेश में 32000 तालाबों की संख्या में से 20000 तालाब बुन्देलखण्ड में है। चरखारी के सभी आठ तालाबों जयसागर, मलखान सागर, रपट तलैया, रतन सागर, वशिया ताल, कोरी तालाब, दिहुलिया तालाब व गुमान बिहारी तालाब की खुदाई कर उनकी जल संग्रहण क्षमता बढ़ा दी गई है।

पूर्व चरखारी स्टेट की राजमाता उर्मिला सिंह और युवराज जयराज सिंह ने अपने पूर्वजों का वैभव लौटाने के लिए मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव का धन्यवाद किया। उनका कहना था कि उनके पूर्वजों ने प्रजा के लिए 16 वीं शताब्दी में सात तालाबों का निर्माण बस्ती में तथा सात तालाबों का निर्माण मंगलगढ़ दुर्ग में कराया था। दुर्ग अब सेना के नियंत्रण में है। महारानी का कहना था कि जबसे ये तालाब बने तब से लेकर आज तक वे कभी भी साफ नहीं हुए होंगे, पर मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव ने तीव्रता से काम कराकर इनका जीर्णोद्धार करा दिया। बिना पानी के तालाबों के साथ जो जीवन सूख गया था उसे नया जीवन अखिलेश जी ने दिया है।

उल्लेखनीय है कि बुन्देलखण्ड में बुन्देल राजाओं द्वारा 200 साल पहले बड़े-बड़े तालाब खुदवाए गए थे, लेकिन पिछले 65 सालों में किसी ने भी उन तालाबों के पुनर्जीवन की सुध नहीं ली और अधिकांश में सिल्ट जमा हो गई। समाजवादी सरकार ने अपने संसाधनों से लगभग 140 करोड़ रुपये खर्च कर रिकार्ड समय में 100 तालाबों को पुनर्जीवन दिया। गत 65 वर्षों में जहाँ 24 अदद बांध बने थे वहीं समाजवादी सरकार के 4 वर्षों में 18 बांधों का निर्माण कार्य शुरू हुआ। लहचूरा बांध परियोजना 30 वर्ष पूर्व प्रारम्भ हुई थी जिसे समाजवादी सरकार ने अपने संसाधनों से पूरा किया है। जनपद ललितपुर के बालाबेहट में कोरियाई तकनीक पर रबर डैम का निर्माण होना है।

महोबा की यात्रा के दौरान लगभग तीन दर्जन परियोजनाओं का मुख्यमंत्री जी ने लोकार्पण किया था। इनमें संपर्क मार्ग, 50 शैय्या का प्रसूति केन्द्र, स्कूल-कॉलेज – पॉलीटेक्निक तथा आवासीय निर्माण आदि शामिल थे। चित्रकूट में स्पोर्टस स्टेडियम बनेगा। बुन्देलखण्ड में तिलहन प्लांट की स्थापना के लिए वर्ष 2016-17 के बजट में 15 करोड़ रुपये रखे गए हैं। जिला मुख्यालयों को सड़कों से जोड़ने का कार्य प्रगति पर है। सौर ऊर्जा के क्षेत्र में कई जनपदों में सौर ऊर्जा परियोजना से सैकड़ों मेगावाट विद्युत उत्पादित हो रही है। एरच में बेतवा नदी पर बांध बनाकर विद्युत उत्पादन 100 वर्ष बाद श्री अखिलेश यादव ने शुभारम्भ कराया है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ने हद कर दी जब बुन्देलखण्ड में मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव के द्वारा किये गये विकास कार्यों की बिना जानकारी के ही टिप्पणी कर गए। यह भी जानना चाहिए कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष बुन्देलखण्ड की भौगोलिक स्थिति से अवगत भी नहीं हैं।

बुन्देलखण्ड में मुख्यमंत्री जी ने विकास की जो संतुलनकारी और समावेशी नीति अपनाई है, उससे इस क्षेत्र में बुनियादी बदलाव दिखाई देने लगा है। एक ओर जहाँ इस क्षेत्र में तालाब, कुओं के साथ नदियों में अबाध जल प्रवाह की व्यवस्था कर एक नई जल क्रान्ति का सृजन हुआ है, वही बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण भी हो रहा है। 5 करोड़ से ज्यादा पेड़ एक ही दिन में लगाने का लक्ष्य है। पर्यावरण संतुलन के लिए पीपल, बरगद, गूलर, आँवला, कदम, पंचवटी के वृक्ष लगाए जा रहे हैं। इसके अतिरिक्त आर्गेनिक खेती को बुन्देलखण्ड में बढ़ावा दिया जायेगा। दलहन और तिलहन की खेती को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। किनवा, चीया, मटर, चना, मक्का, तिल, अलसी जैसी फसलों से किसानों की आमदनी चार गुनी बढ़ सकती है। इससे गाँवों से पलायन भी रुकेगा। हराभरा और संपन्न बुन्देलखण्ड बनेगा। मुख्यमंत्री जी के इन कदमों की प्रशंसा जल पुरुष ने भी की।

श्री अखिलेश यादव के चरखारी दौरे के समय भी लोगो में उतना ही उत्साह था जितना महोबा और ललितपुर दौरे में दिखाई दिया था। 46 डिग्री के तापमान में तपती दुपहरी में लू के थपेड़ों के बीच भी हजारों लोग श्री अखिलेश यादव जिन्दाबाद के नारे लगा रहे थे। दूर तक यह गूँज जा रही थी। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे किसान और नौजवान सब उनके स्वागत में लंबे इंतजार के बाद भी खड़े थे। मुख्यमंत्री जी ने उन्हें निराश नहीं किया और जनता के बीच जाकर लोगों से उनका हाल-चाल पूछा। उन्होंने भरोसा दिलाया कि गरीब का पैसा गरीब तक पहुँचेगा। खजाने का दुरुपयोग नहीं होने दिया जायेगा।

जब भी मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव नौजवानों के बीच जाते हैं, सदियों से गरीबी की मार झेल रहे, बेकारी से पस्त उनके चेहरों पर भरोसा और उम्मीदों की चमक दिखाई देने लगती है। वैसे भी मुख्यमंत्री जी गाँव-गाँव तक शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, बिजली पानी की सुचारु व्यवस्था हो, इसके लिए न सिर्फ बराबर सोचते हैं, बल्कि योजनाओं के कार्यान्वयन पर भी पूरी नजर रखते हैं। वे चाहते हैं सबको आत्मसम्मान के साथ जीने का अधिकार मिले।

पर्दे के पीछे से समाजवादी सरकार पर हमले की तैयारी है। झूठे आरोपों का अभियान चलाने की भाजपा ने रणनीति बनायी है। श्री अखिलेश यादव जब जनता से पूछते हैं कि भाजपा के झूठे आरोपों से कौन बचायेगा, तब जनता एक स्वर में आवाज देती है कि हम भाजपा के झूठ का पर्दाफाश करेंगे। भाजपा की विकास विरोधी मानसिकता के चलते कभी कैराना, कभी कांधला, कभी मुजफ्फरनगर, कभी कांठ और मथुरा के मसले उठाए जाते हैं ताकि जनता गुमराह हो जाये। भाजपा जानबूझकर गैर जरूरी मुद्दों को भी सांप्रदायिक रंग में रंगकर पेश करती है। इस तरह वह अपनी कमजोरियों को छुपाने का भी काम करती है क्योंकि दो वर्ष में केन्द्र की भाजपा सरकार अपना एक भी वादा पूरा नहीं कर पाई है।

बुन्देलखण्ड सहित समस्त राज्य में विकास को तीव्र गति देते हुए बिना भेदभाव और तत्परता के साथ श्री अखिलेश यादव ने जनहित की योजनाएं लागू की हैं। इस विकास से चिढ़े हुए विपक्षी लोकतांत्रिक मर्यादाओं के इतर नफरत से भरे हुए हैं। वे समाजवादी सरकार के विकास कार्यों को दरकिनार कर मुख्यमंत्री जी पर मिथ्या आरोप लगाते रहते हैं, लेकिन राज्य की जागरूक जनता सच्चाई से अवगत है और वह किसी भ्रमजाल में फँसने वाली नहीं।

 (गेस्ट ऑथर : राजेन्द्र चौधरी समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता एवं कैबिनेट मंत्री उ.प्र. शासन हैं)