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आज की तारीख, यूपी के हर चाय की दुकान पर चर्चा का विषय अगर कोई है तो वह सिर्फ अखिलेश यादव हैं। चाय पीने के बाद जब हम सोशल मीडिया की ओर रुख करते हैं। तो यूपी के नौजवान यूपी में दोबारा सीएम के लिए अखिलेश के नाम पर आम सहमत हैं। गांव की महिलाओं और बुजुर्गों में अखिलेश में वह जूनून दिखता है। जो आज से पहले कभी यूपी में किसी नेता के लिए नहीं देखने को मिला था। इन बातों को अख़बारों में भी लगातार जगह मिलती है और बात आती है विकास की तो अखिलेश यादव के नाम पर पूरे प्रदेश के वोटर एक जुट होता दीखता है।

ये सारी अखिलेश की लोकप्रियता को आसमानी बुलंदियां प्रदान करती हैं। अखिलेश के विकास कार्य लगातार जमीन पर नये युग का आह्वान करते हैं। मेट्रो, एक्सप्रेसवे, हाईवे और आईटी सिटी जैसे बड़े प्रोजेक्ट अब जमीनी रूप ले चुके हैं। जिससे प्रदेश में उद्योग को बढ़ावा मिला है। हालांकि इसका श्रेय भी युवा और दूरदर्शी सीएम अखिलेश यादव को ही जाता है। प्रवासी दिवस, पर्यटन को बढ़ावा देना और यूपी में निवेश का माहौल बनाने का काम अखिलेश यादव ने किया है।

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इसी सिलसिले में उद्योग मण्डल एसोचैम ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सभी प्रमुख पार्टियों को अपने घोषणापत्र में शामिल करने के लिये विकास से सम्बन्धित सुझाव दिये हैं। एसोचैम ने राज्य के विकास की सम्भावनाओं का गहन आकलन करके एक परामर्श एजेण्डा के तहत वादे सुझाये हैं। उसका कहना है कि अगर राजनीतिक पार्टियां अपने घोषणापत्र में इन सुझावों को वादों के तौर पर शामिल करें तो वे न सिर्फ जनता को तरक्की की नयी उम्मीद दे सकती हैं, बल्कि सत्ता में आने पर उन्हें एक फलदायी दिशा भी मिल सकती है। आपको यहां बताना चाहेंगे कि अखिलेश यादव का इस चुनाव में मुख्य मुद्दा विकास है। बाकी दल जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं।

छोटे उद्योग बन रहे विकास का आधार

एसोचैम ने उत्तर प्रदेश को लेकर स्पेशल टास्क फोर्स कार्ययोजना बनायी है, ताकि इस प्रदेश को अगले पांच साल में दोहरे अंकों में विकास दर प्राप्त करने और उच्च आय वाले राज्यों के क्लब में शामिल होने में मदद मिल सके। उद्योग मण्डल ने सुझाव दिया है कि उत्तर प्रदेश में लघु तथा मझोले उद्योगों एसएमई तथा स्टार्टअप्स के लिये प्रौद्योगिकीय मंच तैयार करने पर जोर देकर अगले पांच साल में रोजगार के 80 लाख नये अवसर उत्पन्न करने का लक्ष्य तय किया जाना चाहिये। सीएम अखिलेश इसी विकास प्रक्रिया को आगे लेकर बढ़ रहे हैं। उनके दूसरे कार्यकाल में इस विकास प्रक्रिया को लागू करना है।

एसोचैम ने अखिलेश को सराहा

आपको बता दें अखिलेश के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ने पिछले कुछ वर्षों के दौरान प्रभावशाली आर्थिक विकास हासिल किया है। इस राज्य में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होने की क्षमता है, बशर्ते वह अपनी गति को बनाये रखे और अगले पांच साल के दौरान विकास दर को दोहरे अंकों में पहुंचाये। यह ध्यान देने योग्य बात है कि वित्तीय वर्ष 2015-16 में जहां यूपी की आर्थिक विकास दर देश की विकास दर से ज्यादा थी, वहीं देश की अर्थव्यवस्था में इस राज्य के योगदान की दर में भी लगातार सुधार हुआ था। ऐसा प्रदेश की मौजूदा सरकार द्वारा आर्थिक गतिविधियों में निरन्तरता के कारण हुआ था।