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बहुत लोग तर्क दे रहे हैं कि जिनके पास आईडी नहीं है, उनके पास 1000-500 रुपये भी नहीं होंगे। कितना अमानवीय तर्क है ये कभी सोचा है आपने ? वो कौन हैं ,जिनके पास 1000-2000-5000 रुपये कैश तो हो सकता है। लेकिन बैंक अकाउंट और आईडी नहीं होती है। ऐसे लोगों की संख्या पूरे देश में तो करोड़ों के पास होगी। ऐसे लोग अपनी कमाई में फिजूलखर्ची से बचते हुए 1000-2000 रुपये बचाते रहते हैं।

ऐसा व्यक्ति गांव का किसान भी हो सकता है, रिक्शा चलाने वाले भी हो सकते हैं, रेहड़ी लगाकर आलू टमाटर गाजर बेचने वाले भी हो सकते हैं। कुल मिलाकर ऐसी आबादी गांवों में ज्यादा है। जिनके पास आज भी अपना पहचान पत्र नहीं है। लेकिन मोदी सरकार ने ऐसे लोगों के बारे में बगैर सोचे 500 और 1000 रुपये की नोट पर बैन लगा दिया।

इन नोटों के अचानक बंद कर दिए जाने के फैसले पर यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मोदी सरकार को एक बड़ी नसीहत दी है। उन्होंने कहा है कि 500 और 1000 रुपये को बंद किये जाने के बाद केन्द्र सरकार को गांव में रहने वाले लोगों, गरीबों और किसान वर्ग के लोगों के हितों के बारे में भी सोचना चाहिए था। इस फैसले से ऐसे लोगों को समस्याओं का समाना करना पड़ रहा है।

समाजवादी विचारधारा के अगुवा सीएम अखिलेश ने केंद्र सरकार से कहा कि ग्रामीण इलाकों में बैंक शाखाओं की संख्या कमी है। इस वजह से ही केन्द्र सरकार को इन इलाकों में विशेष शिविर लगाकर पुराने नोटों को बदलने का इंतजाम करना चाहिए।