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बदलता दौर तकनीकी का दौर है। जिसके लिए हमें तकनीकी क्षमता से न सिर्फ लैस होने की जरूरत है, बल्कि हमें रोजाना खुद को नई तकनीक से अपडेट भी रहना होता है। तकनीक की इस आहट को हमारे प्रदेश के सबसे युवा नेता और डिजिटल सीएम ने साल 2012 में बखूबी पहचान लिया था। इसी बात को ध्यान में रखकर उन्होंने युवा और मेधावी छात्रों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए मुफ्त में लैपटॉप देने का निर्णय लिया था। जो अब काफी कारगर साबित हो रहा है।

प्रदेश सरकार की लैपटॉप वितरण योजना को लेकर गिरि इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज के अध्ययन में ये नतीजे सामने आए हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक लाभार्थी 86 फीसदी छात्र-छात्राओं ने माना है कि इस योजना से उनके एकेडमिक परफार्मेंस में काफी सुधार आया है। साथ ही इस योजना की वजह से प्रदेश के छात्रों में कंप्यूटर पर कामकाज को लेकर समझदारी बढ़ी है। इसके अलावा 53 फीसदी छात्रों का मानना है कि सामाजिक मुद्दों के प्रति उनकी जागरूकता पहले से बेहतर हुई है। 21 फीसदी छात्र लैपटॉप की मदद से आंशिक रूप से अपनी आय बढ़ाने में कामयाब हुए हैं। इंस्टीट्यूट के सीनियर फैलो डॉ। सीएस वर्मा ने स्टडी के लिए 13 जिलों के 16 कॉलेजों के 3200 लाभार्थी छात्रों को चुना।  जिनमें 64 फीसदी से ज्यादा स्टूडेंट्स मानते हैं कि उनकी कंप्यूटर व आईटी स्किल बढ़ी है। उन्हें लगता है कि आईटी स्किल का लाभ उन्हें भविष्य में रोजगार के अवसरों में मिलेगा। फ्रेश ग्रेजुएट या ग्रेजुएशन कर रहे योजना के लाभार्थी स्टूडेंटस में 20 फीसदी पढ़ाई के साथ घर पर ही लैपटॉप से पार्टटाइम काम करके पैसा कमा रहे हैं। 89 फीसदी छात्र-छात्राएं चाहते हैं कि 12वीं कक्षा पास करने वाले स्टूडेंट्स के लिए लैपटॉप वितरण योजना जारी रहनी चाहिए।

इस सर्वे से अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का विजन प्रदेश के विकास को लेकर कितना साफ़ और पूर्वाग्राही है। उनकी सोच और प्रदेश के विकास के लिए एक से बढ़कर एक कल्याणकारी योजनाओं के चलते यूपी आज तेजी से उत्तम प्रदेश बनने की राह पर अग्रसर है।