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साल 2003-04 का वह दौर था। जब अखिलेश यादव राजनीति का ककहरा सीख रहे थे। बतौर सांसद और युवा संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में सैदपुर के उप चुनाव के दौरान अखि‍लेश यादव काशी में जनसभा करने गये थे। लोहिया वाहिनी के पूर्व प्रदेश सचिव आनंद चौरसिया उस वक्त को याद करते हुए कहते हैं कि  राजनाथ यादव प्रत्याशी थे। मंच पर अखिलेश यादव के लिए कुर्सी लगाई गई। लेकिन उसे हटवाकर वह राजबब्बर के साथ मंच की जमीन पर ही पैर लटका कर बैठ गए। इस सादगी के कायल वहां बैठी पूरी जनता और मौजूदा समय के कांग्रेस अध्यक्ष राज बब्बर भी हो गये थे।

 

सादगी पसंद सीएम अखिलेश

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समाजवादी कार्यकर्ता आनंद चौरसिया बताते हैं कि सीएम अखि‍लेश यादव कई दिनों तक उनके बीच रहे और चुनाव प्रचार का काम किया। उन्होंने कभी भी खुद को जनता से अलग नहीं पेश किया है। फिल्म अभिनेता राजबब्बर उस समय बड़े स्टार हुआ करते थे और अखिलेश की सादगी के कायल थे।
खाने में पसंद है बाजरे की रोटी और मेथी का साग

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अखि‍लेश यादव जिस तरह अपने व्यक्तित्व के लिए जाने जाते हैं। उसी तरह वह खाने-पीने के मामले में भी बेहद सादगी पसंद हैं। उस वक्त चुनाव प्रचार करके जब वह शाम में आते थे। तो लाल जी पहलवान के घर खाना खाते थे। अखिलेश यादव सुबह के खाने में हरी साग की सब्जी, लौकी, गोभी की सब्जी और फुल्की रोटी खाते थे। खाने के बाद उन्हें गुड़ बहुत पसंद था। साथ ही खाने में ग्रीन सलाद भी लेते थे। इसके अलावा सीएम अखिलेश को खाने में बाजरे की रोटी, मेथी का साग और दाल बहुत पसंद है। खाने के पहले उनको सूप पीना बहुत पसंद है।

 

जमीन से जुड़ाव

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साल 2009 का समय था, एक बार फिर सीएम अखिलेश गाजीपुर उप चुनाव में प्रचार करने गये थे। शाम को जब होटल पहुंचे तो आनंद चौरसिया ने कहा कि भैया आज आपके कारण हमारा शिवरात्रि का मजा बिगड़ गया। जिस पर अखिलेश बोले ऐसा क्या हुआ हमारे कारण, क्यों मजा किरकिरा हो गया? चौरसिया ने बताया आज के दिन हम लोग बाबा शिव का प्रसाद ठंडई पीते हैं। जो आज नहीं पिए हैं। सीएम ने फ़ौरन कहा कि यहीं मंगवाओ हम सब मिलकर पीते हैं। फिर ठंडई आई और अखि‍लेश के साथ सभी ने ठंडई का मजा लिया।
कार्यकर्ताओं का साथ कभी नहीं छोड़ते हैं

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साल 2011-12 की बात है, प्रदेश में मायावती की बसपा सरकार थी। उस समय लोहिया वाहिनी के महानगर अध्यक्ष दीपचंद गुप्ता थे। जिनके नेतृत्व में हर जिले में पार्टी का आंदोलन चल रहा था। जिला मुख्यालय पर आंदोलन के दौरान जबरदस्त लाठीचार्ज हुआ। उसमे वह बुरी तरह घायल हो गये। उन्हें दीनदयाल हॉस्‍पिटल में भर्ती कराया गया। जिसकी खबर पाते ही अखिलेश यादव फ़ौरन उन्हें देखने अस्पताल पहुंच गये। अखिलेश ने तभी वादा किया था कि सच्चे कार्यकर्ताओं का साथ कभी नहीं छोडूंगा। जो सिलसिला आज भी बरकरार है।