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अमूमन पद की गरिमा के नाम पर हम सभी को बात और व्यवहार के तरीके बदलने की ताकीद दे दी जाती है। कई ओहदेदार भी इसे बड़ी संजीदगी के साथ अमल करते हैं। कभी पद की गरिमा का सवाल तो कभी प्रोटोकॉल की बेड़ी। इन सबके बाद भी जमीन से जुड़ा इंसान भला अपनी जमीन, अपना आचरण कैसे भूल सकता है। मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश यादव करीब पांच साल तक यूपी की सत्ता के सरताज होने के बावजूद आज भी जमीन से जुड़े हुए हैं। उनमें लेशमात्र की बनावट नजर नहीं आती है। ये तस्वीरें भी तो यही बयां करती हैं।

पहली तस्वीर है आजमगढ़ के डीएम सुहास एलवाई के साथ मुलाकात की। बीजिंग में आयोजित एशियन पैरा बैडमिंटन चैंपियनशिप मे गोल्ड मेडल जीत कर दुनिया में भारत और उत्तर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले सुहास जब सीएम अखिलेश से मुलाकात के लिए उनके मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। प्रोटोकॉल की परवाह किए बिना सीएम अखिलेश ने सुहास से ऐसे मुलाकात की जैसे आमतौर पर लोग आपस में संवाद करते हैं। यहां टेबल से दो छोर नहीं थे, बल्कि रिलैक्स्ड मूड में सीएम अखिलेश साथी सुहास का स्वागत कर रहे थे।

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दूसरी तस्वीर है लखनऊ मेट्रो के ट्रायल रन के शुभारम्भ अवसर पर यशभारती पुरस्कार वितरण समारोह की। क्षेत्रीय गांधी आश्रम लखनऊ के संचालक रामेश्वर नाथ मिश्र जब पुरस्कार ग्रहण के लिए आमंत्रित किया गए तो सीएम अखिलेश ने आगे बढ़कर उनका स्वागत किया। फिर बेहद सहज भाव से उनके गले में पहने हुए आईकार्ड को सीधा किया। एक मुख्यमंत्री के तौर पर ऐसी केयर शायद ही कहीं देखने को मिलती है।

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आज के दौर में जब राजनीतिज्ञों में मूल्यों का ह्रास देखने को मिलता है, तब सीएम अखिलेश की ऐसी उदारता, संवेदनशीलता और सहज भाव आह्लादित करती हैं। आमतौर पर कुछ नामचीन नेता चुनाव के दौरान अपनी बनावटी बॉडी  लैंग्वेज से जनता के हमदर्द होने की कोशिश करते दिखते हैं, जबकि अखिलेश में यही खूबियां स्वाभाविक तौर पर दिखाई देती हैं। कभी बीच सड़क पर खड़े होकर चाय पीना तो ठेले से अमरूद खरीदकर खाना उन्हें सीएम के रौब-रूआब से दूर जनता का सीएम बनाती हैं।

देखिये ये तस्वीरें भी जनता के सीएम अखिलेश की

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