मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के व्यक्तित्व में सोमवार को उस वक्त एक और सितारा जड़ गया, जब उन्होंने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बगैर एक एंबुलेंस को रास्ता दिया, साथ ही साथ सुरक्षा कर्मियों को निर्देश दिया कि एंबुलेंस को अस्पताल तक बिना दिक्कत पहुंचने के लिए उसे एस्कार्ट करें।

मुख्यमंत्री अखिलेश सोमवार को बदायूं और बरेली के दौरे पर गए थे। वहां से लौटने के दौरान करीब 6:20 बजे लखनऊ में अमौसी एयरपोर्ट से वह सरकारी आवास की ओर जा रहे थे। मुख्यमंत्री का काफिला एयरपोर्ट से बंगला बाजार के पास पहुंचा था कि पीछे से हूटर बजाती एक एंबुलेंस की आवाज सुनाई दी। मुख्यमंत्री ने तुरंत अपनी फ्लीट को रुकने का इशारा किया और एंबुलेंस को पास देने को बोला। सीएम ने अपनी सुरक्षा की परवाह किए बगैर न सिर्फ अपने काफिले को रोका बल्कि अपने सुरक्षाकर्मियों को निर्देश दिया कि एम्बुलेंस को केजीएमयू तक एस्कॉर्ट किया जाए, ताकि मरीज को अस्पताल तक पहुंचने में देरी न हो। उनके निर्देश पर सुरक्षाकर्मियों ने एम्बुलेंस के लिए पूरे रूट को ग्रीन कॉरिडोर में तब्दील कर दिया और मरीज को केजीएमयू तक एस्कॉर्ट करते हुए ले गए जहां डॉक्टरों ने मुस्तैदी दिखाते हुए फौरन इलाज शुरू कर दिया। मुख्यमंत्री के समय रहते की गई इस मानवीय पहल की पूरे देश में सराहना हो रही है।

दरअसल, हृदय रोग से पीड़ित पेशे से फिजिशियन 67 साल के डॉ. रत्नेश चैधरी इलाज के लिए लखनऊ से दिल्ली जा रहे थे। अमौसी एयरपोर्ट पर उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ गया। उनके साथ यात्रा कर रहे रंजीत कुमार ने तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा को फोनकर बुलाया। वे अस्पताल जा रहे थे कि रास्ते में मुख्यमंत्री का काफिला मिल गया, जहां मुख्यमंत्री ने समय रहते कदम उठाते हुए डॉ. रत्नेश को मदद पहुंचाई।

इससे पहले भी कई मौकों पर मुख्यमंत्री ने मानवता की मिसाल पेश कर लोगों को नई जिंदगी देने का काम किया है। लखनऊ के जीपीओ पर टाइपिस्ट कृष्ण कुमार की घटना, देवरिया की बच्ची रेनू के ट्यूमर का ऑपरेशन, गाजियाबाद की महिला ऑटो चालक रुबी सिंह को नया ऑटो दिलाने जैसी पहल भी सीएम कर चुके हैं। सीएम के इस फैसले की हर कोई तारीफ कर रहा है। सबके जुबान पर एक ही चर्चा है नेता हो तो ऐसा हो जो आमजन के दुख-दर्द को समझे।