गरीब बच्चों के स्कूल में एडमिशन के लिए गाजियाबाद में भोवापुर इलाके में रहने वाली अपर्णा चंदेल की जब केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया ने मदद नहीं की तो उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को ट्वीट किया। दूसरे नेताओं से अलग अखिलेश यादव ने इस पर फौरन कार्रवाई की और सभी बच्चों का स्कूल में एडमिशन कराया।
वैशाली सेक्टर 4 में रहने वाली अपर्णा ‘साहस’ नाम से एनजीओ चलाती हैं और कूड़ा बीनने वाले गरीब बच्चों को पढ़ाती हैं। लेकिन औपचारिक शिक्षा के लिए उन बच्चों का स्कूल में दाखिला कराना जरूरी था। स्थानीय स्कूलों में जब उन्होंने एडमिशन के लिए संपर्क किया तो सरकारी स्कूल दिल्ली और यूपी की सीमा का हवाला देने लगे, क्योंकि भोवापुर बार्डर पर है। अपर्णा ने इसके लिए स्मृति ईरानी, अरविंद केजरिवाल और मनीष सिसौदिया से भी अनुरोध किया, लेकिन कहीं से सफलता नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने 7 जून को सुबह करीब 7:27 बजे सीएम अखिलेश यादव व सीएम ऑफिस यूपी के ट्विटर हैंडल पर एक ट्वीट किया था। कुछ घंटे बाद जवाब आया कि हम संबंधित विभाग से इसे चेक कराएंगे। मुख्यमंत्री ने इसके फौरन बाद गाजियाबाद के जिलाधिकारी विमल कुमार शर्मा को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री के निर्देश पर डीएम गाजियाबाद ने अपर्णा को फोन किया और अगले ही दिन यानी 8 जून को बीएसए टीम के साथ पहुंच गए।
अर्पणा ने बताया कि बेसिक शिक्षा अधिकारी प्रवेश यादव ने दौरे के दौरान कहा कि गरीब बच्चों को प्राइवेट स्कूलों में ईडब्ल्यूएस कोटे के तहत एडमिशन दिलाया जाएगा। क्योंकि कौशांबी स्थित प्राथमिक स्कूल में 10 साल से अधिक आयु वर्ग के बच्चों के लिए कोई व्यवस्था नहीं है, ऐसे में इनके लिए प्राइवेट स्कूलों में व्यवस्था की जाएगी। इससे पहले भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव एक सूचना मात्र पर आगे बढ़कर समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों की मदद करते रहे हैं।

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