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लखनऊ की सड़कों पर युवाओं और अखिलेश समर्थकों का हुजूम जमा था। पूरे परिधि पर सिर्फ एक ही नारा गूंज रहा था, जय समाजवाद, जय अखिलेश और अखिलेश भैया संघर्ष करो हम तुम्हारे साथ हैं जैसे नारे लग रहे थे। ये दृश्य किसी राजनीतिक तौर किसी नेता के समर्थकों का था। लेकिन जब हम दिसम्बर से जनवरी में जाने की तैयारी में हों और लखनऊ पारा 7 से 8 डिग्री पर लुढ़का हो तो ये महान दृश्य हमारे अंदर एक जबरदस्त उर्जा का संचार करता है।

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खांटी समाजवादियों का दुखी होना लाजिमी है, लेकिन दूसरी ओर जब हम आम जनमानस की भावना को टटोलने की कोशिश करते हैं। तो हमें अखिलेश के प्रति अपार प्रेम और स्नेह को देखकर दक्षिण भारत के नेताओं की याद बरबस आ जाती। उत्तर प्रदेश भले ही भारत में सत्ता का केंद्र रहा हो, लेकिन किसी नेता को इतना प्यार पहली बार मिल रहा है। जमीन से लेकर सोशल मीडिया के स्टेटस में भी यूपी के सबसे युवा सीएम को अपार जन समर्थन हासिल हो रहा है। यहीं नहीं लोग दलगत राजनीति को किनारे करके अखिलेश यादव को विकास पुरुष तक की संज्ञा दे रहे हैं।

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आखिर अखिलेश में ऐसा क्या जादू है? जो उनके समर्थक ऐसे रो रहे हैं, जैसे अखिलेश नेता नहीं जननायक हों। चुनाव में उतरने से पहले ही यूपी के युवा और आम जनमानस जिनमें महिलाओं की संख्या भी काफी है। सबके सब अखिलेश यादव के दीवाने हो गये हैं। ऐसे में यूपी चुनाव में क्या हश्र होगा इसका अंदाजा अभी से लगाया जा सकता है। युवाओं के जोशीले नारों की गरमी ने सर्द रात के फाहों में भी गरमाहट ला दी है। तो विपक्षी दलों बसपा और भाजपा की नीदें भी हराम हो गयी हैं।