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डिजिटल क्रांति से न सिर्फ सुविधाओं का दायरा बढ़ा है, साथ ही पारदर्शिता भी काफी बढ़ी है। अब उत्तर प्रदेश सरकार के इस अहम फैसले को ही ले लें। जिसमें ई-गर्वनेंस को बढ़ावा देते हुए सरकार ने किसानों को उनकी खतौनी जैसे अहम दस्तावेज को भी डिजिटल कर दिया है। जिसकी ज़रूरत किसान को अक्सर होती है। प्रदेश की अखिलेश सरकार के इस कदम से किसान को मीलों दूर तहसील के चक्कर और लंबी कतार लगाने से मुक्ति मिलेगी।

डिजिटल खतौनी की शुरुआत राजधानी लखनऊ के राजस्व विभाग से शुरू हो चुकी है। इसके माध्यम से कोई भी किसान अब पहले से डिजिटली हस्ताक्षरित खतौनी का प्रिंट आउट प्राप्त कर सकता है। जिसमें सिर्फ 10 से15 मिनट का समय लगेगा। हालाँकि खतौनी पहले भी ऑनलाइन देखी जा सकती थीं, लेकिन उन्हें किसान किसी आधिकारिक कार्य में प्रयोग नहीं कर पाता था। जिसके लिए किसानों को तहसील जाना पड़ता था। लेकिन नई स्कीम के साथ अब ये समस्या नहीं रहेगी। नियमों में संशोधन कर अब राजस्व विभाग ने व्यवस्था कर दी है कि किसान किसी भी जन सेवा केंद्र या इंटरनेट की उपलब्धता वाले स्थान से खतौनी निकलवा सकता है। जो हर सरकारी गतिविधि में मान्य होगी।

ऐसे में प्रदेश सरकार द्वारा उठाया गया ये कदम आम जनता और किसानों के लिए राहत लायेगा। इसके अलावा इस योजना की मदद से सरकार के कार्यों में पारदर्शिता भी बढ़ेगी। जो सबसे महत्वपूर्ण है।