akhilesh teacher

उत्तर प्रदेश देवों और ऋषि मुनियों की धरा रही है। जहाँ के कण-कण में आज में सामाजिक सद्भाव और भाईचारा बना हुआ है। हमारी पुरानी संस्कृत आज भी जीवंत बनी हुई है। इसकी मुख्य वजह इतनी सी है कि लोग आज भी यहाँ हर रस्म और त्यौहार धूमधाम से बनाते हैं। जिसमें गंगा जमुनी तहजीब साफ़ तौर पर झलकती है। हाल ही मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की कैबिनेट ने समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित आश्रम पद्धति विद्यालयों को नवोदय विद्यालय की तर्ज पर चलाने का फैसला किया है।

ये फैसला इस बात का परिचायक है कि सीएम अखिलेश किस तरह से उत्तर प्रदेश के पुराने रीति-रिवाज के साथ-साथ ऋषियों की भाषा को जिन्दा रखने के लिए संकल्पित हैं। सीएम ने इसके लिए सीबीएसई बोर्ड से भी बात करके इसे संबद्ध करने की घोषणा की है। आश्रम पद्धति विद्यालयों में नवोदय विद्यालयों की तरह कक्षा छह से 12 तक की पढ़ाई होगी। हर साल चरणबद्ध तरीके से एक-एक कक्षा कम करते हुए वर्ष 2020-21 तक इन विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक की पढ़ाई समाप्त कर दी जाएगी।

राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में 85 प्रतिशत छात्र ग्रामीण क्षेत्रों से तथा 15 प्रतिशत छात्र शहरी क्षेत्रों से चयनित किये जाएंगे। अभी 59 जिलों में 76 आश्रम पद्धति विद्यालय संचालित हैं। अगले पांच वर्षों में बाकी के 16 जिलों में भी इसकी शुरुआत कर दी जाएगी। कुल मिलाकर प्रदेश की समाजवादी सरकार समाज के सभी हितों की रक्षा करते हुए प्रदेश को विकास के पथ पर अग्रसर करवा रही है।