Uttar Pradesh Chief Minister Akhilesh Yadav at IIA organised North India Solar summit programme in Lucknow on friday. Express photo by Vishal Srivastav 24.04.2015

शिक्षा के स्तर को उठाने के लिए शिक्षक की भूमिका अहम हो जाती है। शिक्षक एक छात्र ही नहीं एक युग तैयार करता है। लेकिन यूपी की पिछली सरकारों ने इस ओर ध्यान ही नहीं दिया। आज अगर शिक्षा का स्तर उठा है, तो इसकी वजह यूपी की मौजूदा अखिलेश सरकार है। सीएम अखिलेश ने हमेशा छात्र हित को सर्वोपरि रखा है। सीएम ने पहले छात्रों को तकनीकी शिक्षा से जोड़ने के लिए लैपटॉप बांटे, उसके बाद उन्होंने मेडिकल की सीटों में इजाफा किया। साथ ही शिक्षकों की अपार कमी को दूर करते हुए नये शिक्षकों की भर्ती के साथ-साथ शिक्षामित्रों का समायोजन किया। इसके बाद अब सीएम ने वित्तविहीन शिक्षकों का मानदेय निर्धारित करके तोहफा दिया है।

अभी तक वित्तविहीन शिक्षकों को सरकार की तरफ से कोई भी मानदेय नहीं मिलता था। मानदेय यूपी बोर्ड से साल 2012 तक मान्यता पाने वाले वित्तविहीन हाईस्कूल और इंटरमीडियट स्कूलों के शिक्षकों को मिलेगा। सरकार ने अलग-अलग पदों के लिए मानदेय निर्धारित किया है।  जिसमें अंशकालिक प्रधानाचार्य के लिए 13,090, अंशकालिक प्रधानाध्यापक को 11,990, अंशकालिक प्रवक्ता को 10,890 और अंशकालिक सहायक अध्यापक को 9,790 रुपये दिये जाऐगें।

अखिलेश सरकार के इस फैसले का लाभ पूरे प्रदेश के करीब 18 हजार स्कूलों में करीब 2 लाख 43 हजार वित्तविहीन शिक्षकों को मिलेगा। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सीएम अखिलेश शिक्षा को प्रगति की ओर ले जाने के लिए कितने संकल्पित हैं।