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किसी भी सभ्य समाज के विकास में सामाजिक तानाबाना सबसे अहम माना जाता है। वही समाज विकास करता है। जहाँ ऊँच-नीच का भेदभाव नहीं होता है। लोग एक दूसरे के साथ घुल मिलकर रहते हैं। प्रदेश की अखिलेश सरकार ऐसे ही समाज की स्थापना करने की कोशिश करती आई है। प्रदेश सरकार ऐसे लोगों को सम्मानित करती है। जो अंतरजातीय विवाह करते हैं। अंतरजातीय विवाह करने वालों को पचास हजार रुपये नकद और मेडल के साथ ही प्रशस्ति पत्र प्रदान करती है।

मेरठ में ऐसे ही आठ से अधिक नवविवाहित जोड़ों को सरकार की ओर से सम्मानित किया जा चुका है। समाज में भाईचारा और अमन-चैन को बढ़ावा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार की ये पहल काफी अहम है। इससे लोगों में प्यार और एक दूसरे के सम्बन्ध में मधुरता आएगी। इसके अलावा पूरे समाज में मोहब्बत का पैगाम जायेगा। जिससे समाज में बराबरी की पहल मजबूत होगी। यह स्कीम पूरे राज्य में लागू है, केवल शर्त यह है कि वर या वधू में से कोई एक अनुसूचित जाति का होना चाहिए। सम्मानित होने और इनाम पाने के इच्छुक दंपती को मैरेज सर्टिफिकेट लेकर डिस्ट्रिक्ट मैजिस्ट्रेट के ऑफिस जाना होता है। जहाँ डीएम के संतुष्ट होने पर उनका नाम कमिश्नर के पास भेजा दिया जाता है। वहीं से लाभार्थी को चेक जारी हो जाता है।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले के एक मामले में उच्चतम न्यायालय ने अंतरजातीय विवाह को जायज ठहराया है। इसलिए समाज की बेहतरी के लिए प्रदेश सरकार का ये कदम वास्तव में सराहनीय है। इससे न सिर्फ सामाजिक सद्भाव और आपसी सहयोग बढ़ेगा। बल्कि समाज में सबको बराबरी और सम्मान से रहने का हक़ मिलेगा।