उत्तर प्रदेश सरकार ने आपदा-सूखा से प्रभावित किसानों को भू-राजस्व, कृषि यंत्र से संबंधित वसूली पर सितंबर तक रोक लगाई

samajwadi sukha rahat

 

सूखा या ऐसी कोई आपदा आने से किसानों को चौतरफा नुकसान होता है। एक तो उनकी फसल बर्बाद हो जाती है और दूसरा इसका साइड इफेक्ट होता है- फसल को उगाने के एवज में किए गए खर्च का घाटा और उपज नहीं मिल पाने से अगली फसल पर होने वाले खर्च का नुकसान। चौथा संकट उपज व आमदनी के अभाव में परिवार पर होने वाले खर्च के रूप में सामने आता है। ऐसे में किसानों को सिर्फ राजस्व वसूली में छूट देना काफी नहीं होता है। किसानों की पृष्ठिभूमि से उपजी समाजवादी पार्टी ने इस मुश्किल को बखूबी समझा। यही वजह है कि अखिलेश सरकार ने आपदा-सूखा से प्रभावित किसानों से भू-राजस्व, कृषि यंत्र से संबंधित वसूली पर सितंबर तक तो रोक लगाई  ही है, साथ ही यह भी निर्देश दिया है कि सूखे से प्रभावित बुन्देलखण्ड के जनपदों को उपलब्ध करायी जा रही समाजवादी राहत सामग्री की भांति प्रभावित फतेहपुर, इलाहाबाद, मिर्जापुर एवं सोनभद्र में भी सूखे से प्रभावित लोगों को राहत सामग्री उपलब्ध कराई जाए। बुन्देलखण्ड के अंत्योदय परिवारों में से सूखा प्रभावित परिवारों को अभी सूखा राहत सामग्री के तौर पर 10 किलो आटा, 10 किलो चावल, 5 किलो चने की दाल, 25 किलो आलू, 5 लीटर सरसो का तेल, 1 किलो शुद्ध देशी घी, बच्चों के लिये प्रति परिवार 1 किलो मिल्क पाउडर, 1 किलो चीनी, 1 किलो आयोडीनयुक्त नमक तथा 200 ग्राम हल्दी बांटे जा रहे हैं। यही राहत सामग्री अब फतेहपुर, इलाहाबाद, मिर्जापुर एवं सोनभद्र में भी सूखे से प्रभावित लोगों को भी उपलब्ध कराई जाएगी। निश्चित तौर पर अखिलेश सरकार की ओर से सूखा प्रभावित इलाकों में उठाया गया यह कदम किसानों को बड़ी राहत देने वाला साबित होगा।