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अन्न है तो जन है, ये कहावत ही नहीं बर्शते ये मनुष्य के जीवन का यथार्थ है। अब अन्न के लिए बेहतर खाद और बीज के साथ-साथ पानी की भी जरूरत होती है। लेकिन बीते सालों में मानसून में अमूमन बदलाव देखने को मिला है। किसी क्षेत्र में बारिश ज्यादा होती रही है, तो कहीं बिलकुल ही बारिश नहीं हुई है। इसलिए प्रदेश के किसनों की खेती पर काफी बुरा असर पड़ा है। लेकिन उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार किसानों के दर्द को भलीभांति समझती है। साथ ही किसानों पर मौसम की मार न पड़े उसके लिए अखिलेश सरकार हमेशा किसानों के साथ रही है। जिसके लिए प्रदेश सरकार किसानों के हित में बड़े फैसले करती रही है। वह चाहे किसानों को मुफ्त सिंचाई देने का फैसला हो या फिर उन जगहों पर पानी पहुँचाना हो जहाँ 30 साल तक पानी पहुंचा ही न हो।

हाल ही में प्रदेश की अखिलेश सरकार ने अपने एक अहम फैसले में 12 हजार दलित किसानों के लिये मुफ्त में बोरिंग कराने की घोषणा की है । इससे समाज के उस तबके को फायदा होगा जो हासिये पर है। जिससे वह खेती में अच्छी उपज पैदा करके समाज में अपना उत्थान करने में सफल होगा। इस कार्य के लिए प्रदेश सरकार ने 12 करोड़ रुपये खर्च करने का फैसला किया है। बोरिंग कराने की जिम्मेदारी समाज कल्याण विभाग को सौंपा गया है। योजना का लाभ अनुसूचित जनजाति के किसानों को मिलेगा। अखिलेश सरकार ने प्रत्येक बोरिंग पर 10 हजार रुपये खर्च करने का प्लान बनाया है।

इससे पहले प्रदेश सरकार ने 256 लाख किसानों का तकरीबन 700 करोड़ रुपये का आबपाशी शुल्क माफ़ करके उन्हें बड़ी राहत दी थी। साथ ही युवा मुख्यमंत्री ने सूखा प्रभावित बुन्देलखंड में सिंचाई व्यवस्था को उत्तम बनाने के लिए 7300 किमी नहर और 1589 ट्यूबवेल का निर्माण कराया। जिससे प्रदेश की समाजवादी सरकार की किसानों के प्रति दृष्टिकोण का अंदाजा लगाया जा सकता है।

सोशल समाजवादी भी प्रदेश सरकार के किसानों के हित में लिए गये फैसले का स्वागत करती है।