बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं। बच्चों का जितना बेहतर विकास होगा, भविष्य में राज्य की तरक्की उतनी ही शानदार होगी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस बात को ध्यान में रखते हुए उत्तर प्रदेश की प्रगति का जो रोड मैप तैयार किया, उसमें शुरू से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास अहम रहा। यही वजह है कि स्कूलों के मिड-डे मील में दूध शामिल करने के बाद मुख्यमंत्री ने इस बार के बजट में उन्हें फल देने की घोषणा की है। इसी क्रम में स्कूलों में पढ़ाई को रोचक बनाने की नई शुरुआत की गई है। 

अप्रैल से शुरू हो रहे नए शैक्षणिक सत्र में परिषदीय स्कूलों के बच्चे गिनती और वर्णमाला के साथ ही मूवी और गानों का आनंद लेते हुए भी दिखेंगे। स्कूल में बच्चे अपना अखबार भी निकाल सकेंगे। बेसिक शिक्षा परिषद बच्चों को आकर्षिक करने के लिए परिषद के शैक्षणिक कैलेंडर में कई अन्य रोचक गतिविधियां शामिल की जा रही हैं। इससे कोशिश है कि परिषदीय स्कूलों में बच्चे पढ़ाई के साथ अन्य गतिविधियों में भी शामिल रहें, जिससे स्कूल उनके लिए हौव्वा न साबित हो। इसके बजाय वे स्कूल में आने के लिए उत्साहित रहें। आमतौर पर परिषद के कैलेंडर में प्रवेश और परीक्षा जैसा सामान्य कार्यक्रम होता है। इस साल इससे आगे जाकर बच्चों को मूवी दिखाने, बाल अखबार निकालने, स्कूल में पौधारोपण, खेलकूद आदि गतिविधियां शामिल की जा रही हैं। इन गतिविधियों से बच्चों में स्कूल के प्रति लगाव बढे़गा।