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‘जनता के लिए जिसके मन में प्यार नहीं, जनतंत्र में वह कुर्सी का हकदार नहीं’ – यह शब्द थे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के। पिछले करीब पांच साल के अपने कार्यकाल में उन्हें एक उदार और प्रगतिशील नेता के रूप में अपने आप को जनतंत्र के काबिल साबित कर दिखाया है। न ही सिर्फ उत्तर प्रदेश में, लेकिन अखिलेश यादव की लोकप्रियता पूरे भारत में ही फैल रही है। विकास के रथ पर उम्मीदों का प्रदेश आगे बढ़ते साफ़ दिखाई दे रहा है।

कुछ साल पहले उत्तर प्रदेश की स्थिति ऐसी नहीं थी। अखिलेश यादव ने कार्यकाल संभाला उसके बाद से ही उत्तर प्रदेश को विकास के रास्ते पर आगे ले जाने का ढांचा तैयार किया जाने लगा। एसोचैम ने वर्ष 2012 में ही इस बात के संकेत दे दिए थे कि अपनी विकास गति से उत्तर प्रदेश 10 गुना ज़्यादा विकास दर हासिल करेगा। स्पष्ट है कि 2012 में प्रगति ने जो रफ्तार पकड़ी थी, उसकी गति 2016 तक बरकरार रही।

तमाम परेशानियों के बावजूद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव विकास पुरुष के उभरते गए और अब राजनीति के एक मुख्या किरदार बन गए हैं। ये अखिलेश यादव के व्यक्तित्व का कमाल है कि तमाम अर्थशास्त्री यूपी में गहरी दिलचस्पी दिखा रहे हैं। इसकी एक वजह यह भी है  उत्तर प्रदेश आज देश में निवेश का सबसे आकर्षक स्थान बन चुका है।

पिछले कुछ वर्षों में अखिलेश सरकार ने प्रदेश में अनुकूल आर्थिक वातावरण तैयार किया है। इससे निवेशकों का भी उत्तर प्रदेश में भरोसा बढ़ा है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा आयोजित निवेशक सम्मेलन में उद्योगों ने राज्य में 54 हजार करोड़ रुपये के निवेश की वचनबद्धता से नए यूपी के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। बिजली क्षेत्र में सुधार से 12वीं पंचवर्षीय योजना तक उत्तर प्रदेश के इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर होने की पूरी संभावना है। सामाजिक, आर्थिक पहलुओं पर भी अखिलेश सरकार ने इनोवेटिव तरीके से काम कर सफलता अर्जित की है। ऐसे में जनता की अपेक्षा में उनसे अधिक हैं। अभी उत्तर प्रदेश को विकास के पटरी पर लेकर आए अखिलेश यादव से उनकी अगली पारी में प्रदेश को विकास की नई उंचाई पर स्थापित करने की पूरी उम्मीद है।