उम्र के एक पढ़ाव पर बुजुर्गों के लिए अपनों का साथ बेहद अहम होता है। देखभाल की जरूरत होती है, अपने मन की बात साझा करने के लिए किसी का साथ चाहिए होता है। बुजुर्गों के इसी एकाकीपन को दूर करने की ठानी है समाजवादी सरकार ने। उत्तर प्रदेश में अब बुजुर्गों के लिए समय-समय पर योग शिविर लगाए जाएंगे। साथ ही उनके मानसिक स्वास्थ्य का भी ख्याल किया जाएगा। 

खुद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अगुवाई में 10 मंत्रियों की एक समिति बनाई जा रही है, जो समाज कल्याण विभाग द्वारा जारी वरिष्ठ नागरिक नीति के क्रियान्वयन पर नजर रखेगी। इतना ही नहीं अब हर साल 1 अक्टूबर को स्कूलों में दादा-दादी, नाना-नानी दिवस मनाया जाएगा। सरकार ने वृद्धाश्रम और अनाथाश्रम एक ही परिसर में खोलने का निर्णय किया है, ताकि उन्हें बच्चों के बीच में रहने से एकाकीपन महसूस न हो। केजीएमयू लखनऊ के सेंटर फाॅर एडवांस रिसर्च इन एजिंग एंड जेरियाट्रिक मेंटल हेल्थ को बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य की चिंता के लिए नोडल सेंटर के रूप् में मान्यता दी गई है। नर्सिंग और अन्य पैरा मेडिकल स्टाफ को पढ़ाई के दौरान बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य की चिंता करना सिखाया जाएगा। समाजवादी सरकार बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए वृद्धावस्था पेंशन बढ़कर पहले ही 400 रुपये कर चुकी है। अब उन्हें मनरेगा के तहत कम श्रम वाले कामों मं वरीयता देने का भी फैसला हुआ है। 

इसके अलावा रिटायर होने वाले दिन ही वरिष्ठ नागरिकों को ग्रेच्यूटी सहित सभी भुगतान सुनिश्चित कराए जाएंगे। तो बचत के लिए स्वयं सहायता समूहों की स्थापना पर जोर होगा। वूमेन पाॅवर लाइन की तरह अब बुजुर्गों के लिए राज्य स्तरीय हेल्प लाइन बनाई जाएगी। अकेले रहने वाले बुजुर्गों से बीट कांस्टेबल नियमित रूप से संपर्क करेंगे। वहीं राज्य स्तर पर वरिष्ठ नागरिक कल्याण निधि बनाने के साथ ही उन्हें फ्री कानूनी सहायता दी जाएगी। यूपी रोडवेज की बसों में सीनियर सिटीजन्स के लिए दो सीटें आरक्षित की जाएंगी। किराए में भी छूट मिलेगी।