गरीब बच्चों का आरटीई के तहत अब निजी स्कूलों में भी फ्री दाखिला होगा। समाजवादी सरकार ने गरीब वर्ग के बच्चों की शिक्षा के लिए अहम फैसला उठाते हुए यह कदम उठाया है। शिक्षा विभाग के इस वर्ष जारी नए शासनादेश में वार्ड संबंधी अनिवार्यता हटा ली गई है।

निःशुल्क व अनिवार्य शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत पिछले शासनादेश में निजी स्कूलों में निःशुल्क दाखिले की बात शहरी क्षेत्र के केवल उन वार्डों के लिए कही गई थी, जिनमें एक भी सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल नहीं थे। इस वर्ष पड़ोस शब्द को वार्ड के बजाय एक किलोमीटर कर दिया गया है। अभी तक पड़ोस शब्द का अर्थ संबंधित वार्ड था। वार्ड शहरी क्षेत्र में ही होते हैं, इसलिए ग्रामीण क्षेत्र में सरकारी स्कूल नजदीक न होने पर भी बच्चों को निजी स्कूलों में निःशुल्क दाखिला नहीं मिल पा रहा था। जबकि नए शासनादेश से शहरी क्षेत्र के साथ ही ग्रामीण इलाकों में भी गरीब बच्चों के लिए दाखिलों के दरवाजे खुल गए हैं।

इन स्कूलों में बच्चों को कॉपी-किताब व यूनिफॉर्म निःशुल्क मिलेगा। सरकारी स्कूल की एक कक्षा में 30 एडमिशन होने के बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी होगी कि वह गरीब परिवारों के बच्चों का निःशुल्क दाखिला पड़ोस के निजी स्कूल में कराएं।