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अपनी व्यथा को रचनात्मक दिशा देना आसान नहीं होता। इसके लिए सकारात्मक सोच, कठिन मेहनत और अटूट लगन चाहिए। उत्तर प्रदेश के होनहार इलाहाबाद के रहने वाले विमल किशोर ऐसी ही शख्सियत हैं, जिन्होंने कई महीने की मेहनत के बाद छोटी सी सस्ती कार बना डाली है। पैर में स्थायी विकलांगता के शिकार विमल ने विकलांगों की तकलीफ महसूस कर स्कूटी से कार बनाने की कोशिश शुरू की थी। इस कार को अब वह दिव्यांगों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बनाने जा रहे हैं। विमल ने स्कूटी को जो रूप दिया है, उसे देखकर लोग चौंक रहे हैं। खुद का बिजनेस करने वाले विमल के पास मारुति कार थी। उसे चलाने में उन्हें तकलीफ रहती थी तो विमल ने स्कूटी खरीदी। स्कूटी को कार बनाने के लिए विमल ने दिन रात एक किया और तीन महीने के अथक प्रयास के बाद लैलो को सड़क पर उतार दिया। यह छोटा सा वाहन इलाहाबाद की सड़कों पर गुजरता है तो लोग बड़े अचरज से इसे देखते हैं।

सोलर पावर से चलेगी लैलो

विमल ने लैलो की बॉडी को एसीपी से तैयार किया है। इसकी चादर काफी मजबूत होती है। आजकल मॉल्स में इनका इस्तेमाल किया जाता है। इसके साथ ही सोलर पैनल इसकी छत पर लगाया गया है। जिससे बैट्री चार्ज होती है। दिव्यांगों को कोहरे के वक्त परेशानी न हो, इसलिए लैलो में फॉग लाइट का इस्तेमाल किया गया है। एम्बेसडर के डोर हैंडल, वाइपर और ऑल्टो के शीशे लैलो में इस्तेमाल किए हैं। हॉर्न के लिए सायरन का इस्तेमाल किया गया है। बैलेंस बना रहे इसके लिए दो अतिरिक्त पहिए लगाए हैं। यानी कार में कुल चार पहिए हैं।

स्प्लेंडर के इंजन से बनाएंगे अगली कार

विमल का दावा है कि ये भारत की सबसे छोटी कार है। विकलांग जिनके दोनों हाथ काम करते हों उन्हें इसे चलाने में परेशानी नहीं होगी। फिलहाल दो लोगों के लिए बनी इस कार को स्कूटी से तैयार किया गया है। विमल ने बताया कि अगर सरकार सहयोग करेगी तो अगली कार स्प्लेंडर के इंजन से बनाएंगे। इससे लागत थोड़ी कम आएंगी। फिलहाल इसकी लागत 90 हजार रुपए है।